Friday, April 25, 2008
प्यास बुजती नही
एक बार फ़िर से अब्बु और भै ने मुझे चोदा उस दिन हुअ ये था कि मैन बहुत चुदासि थि और अम्मि नानि के घर गयि हुइ थि ये तो आप लोग जानते हि है कि मेरि फलि चुदायि भि अब्बु ने हि कि थि और फ़िर अम्मि ने भै से भि चुदवाया था और अब वो लोग अकसर मुझे चोदा करते थे मगर इधर बहुत दिन से अब्बु अम्मि कि फ़ैलि हुइ चूत मे मसत थे और भै ने कोइ 2सरि ग/फ़ फ़सा लि थि और मुझपे धयान देना चोद हि दिया था तब आखिर अम्मि के बहर जाते हि मैने सबसे फले अपनि झानते बनायि और रात कलो अब्बु के रूम मे गयि अब्बु कोइ मूविए देख रहे थे और मुझे देख कर बोले बेति कया हुअ आज बहुत दिन बाद अब्बा कि याद आयि तब मैने कहा आप तो अम्मि जान कि चूत मे हि फ़से रहते है अब आपको मेरा ज़रा भि खयाल नहि आपने मुझे कितने दिनो से नहि चोदा है तब अब्बु ने दुलार जताते हुए कहा ऊऊओह्हह्ह मेरि पयारि रानि बेति आजा आज तुझे फ़िए से चोदता हून और ये ख कर उनहोने द।व।द चनगे कर दि अब उसमे एक ब/फ़ चलने लगि जिसमे एक 14 साल कि लदकि को 5 आदमि चोद रहे थे जिसे देख कर मेरि आनखेन बहर आ गयि और मैने अब्बु से कहा अब्बा ये बछि इन 5चो को एक साथ झेल रहि है और उसको कितना मज़ा आ रहा है जबकि इसकि अगे भि अभि जयादा नहि 14।।।15 साल कि होगि तब अब्बु बोले मेरि बछि ये साले अनगरेज लोग ऐसे हि होते है सालि इतनि सि है और तुम खुद हि देखो कैसे मज़े ले।।लेकर 5।।।
5 लनदोन का मज़ा एक साथ ले रहि है जबकि इसमे एक इसका बाप और एक भै के अलावा 3 बहर वाले है अब ये सब देख कर भला मेरि चूत मे खाज़ कयून नहि उथति तब मैने अब्बु से कहा अब्बु मैन तो आप और भै से हि चुदवकर पनाह मानग जाति हून तब अब्बु ने कहा जा बगल के रूम से अफ़ाक को बुला ला साला लनद पकदे सो रहा होगा तब मैन भै के रूम कि तरफ़ बदि और देखा तो सच मे वो अपने लनद को हाथ मे लेकर सदका मार रहा था मैन जलदि से बदते हुए बोलि हाय भैयया कया गज़ब कर रहे हो भला घर मे इतनि खूबसुरत बहन होते हुए तुमहे ये सब करना पदे तो लानत है मेरि जवानि पे और मैने झत से उनका लनद अपने कोमल हाथ मे ले लिया और बदे पयार से शलाने लगि और जलदि।।।जलदि हाथ आगेय पीचे करने लगि और फ़िर झत से मुह मे लेकर चूसने लगिऔर तब भै का लनद पूरि औकात मे आ गया और वो मेरे बालोन को पकदते हुए जोर जोर से धक्का मारने लगे और फ़िर जलदि हि उनका पानि मेरे मुह मे गिरा जिसे मैन चपर।।।चपर करते हुए चात गयि और भै से बोलि चलो अब्बु बुला रहे है आज फ़िर से तुम 2नो मुझे चोदकर मज़ा दो और भै को ननगा हि उनका लनद पकद कर अब्बु के रूम मे ले आयि और भै को देखते हि अब्बु बोले मैने कहा था साला मुथ मार रहा होगा तब मैने कहा अब्बु आप बहुत तजुरबेदार है सच मे भै सदका मार रहे थे और फ़िर मैने अब्बु का लनद अपने मुह मे ले लिया और भै पीचे से मेरि गानद पे अपना लनद रगदते हुए अनदर दालने कि कोसिस करने लगे तब मैने कहा अब्बु जि मैन भि ब/फ़ वालि लदकि कि तरह 5 जन से एक साथ हि चुदाना साहति हून तब अब्बा ने खा बेति तु नहि झेल पायेगि एक साथ 5।।।
5 को मगर मैन तो पूरि तरह से चुदासि हो हि चुकि थि मैने कहा कान खोल के सुन लो आप 2नो मुझे 5जन से एक साथ चुदाना है तो चुदाना है अगर कल आप लोग ने मुझे 5 जन से नहि चुदवाया तो बहुत बुरा होगा तब अब्बु ने कहा अछा अछा मेरि रानि बेति मैन तो तेरे भले के लिये हि ख रहा था अगर तेरि चूत फ़त गयि तो परेसानि तो हमि लोगोन को होगि मगर जब तु नहि मान रहि तो मेरे बला से अब चल आज तो हुम दोनो से चुदवा ले और ये ख कर उनहोने फ़िर से अपना मूसद ऐसा लनद मेरे मुह मे जोरदार धक्के के साथ अनदर धकेल दिया और तभि भै ने पीचे से मेरि गानद फ़ैलकर इतनि जोर से धक्का मारा कि मुझे नानि याद आ गयि ऊऊऊऊउईईईई माआआआआआआ मर गयि आआआआह्हह्हह्हह्ह भै जरा धीरे से धक्का मारो तु तो ननि याद दिला रहा है तब अब्बु ने कहा बेति साहे जिसका नाम ले पर नानि का नाम ना ले तब मैने कहा कयून तब अब्बु बोले तेरि नानि कि चूत मैने मारि थि और कै साल तक मैन उसकि चूत चोदता रहा था तब मेरे साथ साथ भै का मुह भि खुला रह गया तब भै ने कहा अब्बु कया आपने ननि को चोदा है तब अब्बु ने कहा हान यार सालि मेरि सास बहुत मसतानि थि तुझे तो पता हि है कि तेरि अम्मि कि कम उमर मे सादि हुइ थि जब मेरि सादि हुइ थि मैन 19 साल का था और तेरि अम्मि 16 साल कि थि और मेरि सास सिरफ़ 30 साल कि थि मगर मेरे ससुर कि उमर करीब 40साल थि वो तुमहारि ननि को खुस भि नहि कर पाता था जाने भि दो इन बातोन को अभि तो फ़िलहाल चुदायि का मज़ा लो उसकि चुदायि के बारे मे फ़िर कभि बताउनगा और तब भै पीचे से मेरि गानद मार रहे थे और अब्बु आगेय मेरे मुह मे अपने लनद को धक्के लगा रहे थे अब मुझे भि मसति आने लगि और मैन अपने मुह और गानद को आगेय पीचे करते हुए धक्के लगाने लगि थि और तब भै झद गये थे मगर अब्बु जि अभि भि नहि झदे थे और उनहोने मुझे बेद पे खदा होने को कहा मैन खदि हो गयि और तब अब्बु ने मेरे दोनि पैर अपने कनधेय के दयन।।।बयन करे और मेरि चूत को मुह मे भर कर चूसने लगे मैन बुरि तरह तप रहि थि और अपने अब्बु का मुह जोर।।।जोर से अपनि चूत पे दबाने लगि तब हि अब्बु खदे होने कि कोसिस करने लगे और मेरा बलनसे बिगदने लगा तब मैने घबरा कर कहा आआआअह्हह्हह्ह अब्बु कया कर रहे है मैन गिर जाउनगि मगर अब्बु नहि माने और वो मुझे अपने कनधे पे बैथा कर खदे हो गये अब मैन अपनि 2नो तानगेय उनकि गरदन मे कस कर लपेते हुए थि और अपनि चूत को उनके मुह से दबाते हुए उनके सिर को भि जोर।।।
जोर से दबा रहि थि और भै आनख फ़ादे हुए अब्बु के इस पोसे को देख रहा था और कसम से मज़ा तो हमे भि बहुत आ रहा था इस तरह से कोइ फलि बार मेरि चूत चात रहा था और थोदि देर बाद हि मैन ऊऊऊऊऊओह्हह्हह्हह्ह ऊओह्हह्हह्हह्ह आआआआआआह्हह्हह्हह आआआअह्हह्हह्हह्ह करते हुए झद गयि और अब्बु का रस भि नीचे से पिचकारि कि तराह भ गया और तब अब्बु मुझे नीचे उतारते हुए बेद पर लिथकर तुरनत अपने झदे हुए लनद को मेरे 2नो चूचियोन के बीच मे रगदने लगे और मैन उनके नोक कि तराह लनद कि तोपि को मुह मे लेने कि कोसिस कर रहि थि पर अब्बु जलदि।।।।जलदि आगेय।।।पीचे कर रहे थे तब मैने कहा अब्बु अपना लनद मेरे मुह मे दिजिये आपका सारा माल बेकार हि जाया हो रहा है तब अब्बु ने अपने लनद को 2नो चूचि के बीच से मेरे मुह मे दाल दिया और मेरि चूचि को दबाने लगे और इस तराह से उनके लनद से थोदा सा रस और निकला जिसे मैन चात गयि और फ़िर अब्बु ने अपना लनद मेरि गानद मे धास दिया और उस दिन अब्बु और भै 2नो ने मेरि गानद हि मारि थि मेरि बुर के साथ कोइ हरकत नहि कि थि और फ़िर रात को दुबारा भि उन लोगोन ने मेरि गानद एक एक बार और मारि अब मेरि गानद परपरा रहि थि और सुभा अब्बु ने कहा
कयोन रानि बेति कया खयाल है कया अब भि 5 जन से चुदवाओगि तब मैने गुस्से से कहा साला बेतिचोद भोसदि वाले कहा ना चुदवाना है तो चुदवाना है तब अब्बु मुसकुरा कर बोले कोइ बात नहि आज कि रात तैयार रहना आज 5 लोगोन को लेकर आउनगा और फ़िर मुझे अब्बु से ननि कि चुदायि कि बात भि जानि थि आज रात मुझे 5 जन से एक साथ चुदायि का मज़ा आने वाला है मगर मुझे अफ़सोस है कि इस्स रेदरस कि बहुत सारि लदकियोन को सायद आज भि कोइ लनद नसीब नहि होगा और उनहे मोमबत्ति से काम चलाना पदेगा कयोन कि हर लदकि मेरि तराह बाप और भै से नहि चुदवा सकति
Thursday, April 24, 2008
मेरी लडकी

मेरी लडकी
हेल्लो दोसतोन मैन इस्सका रेगयलर रेअदेर हुन । मेरि अगे 49 है । मेरि लरकि कि अगे 20 है । येह मेरि सचि कहनि है जो मैन आप सब को बतना चता हुन । कुन कि मैन फ़निली सेक्स को परोमोते करना चता हुन इस लिये मैन येह सतोरी लिख रहा हुन ।
दोसतोन मेरि बिबि आज से 6 साल पहिले मर गै थि और उस तिमे मेरि लरकि कि उमर 14 साल थि उस के महिने ( मोनथली पेरिओद ) सुरु हो चुके थे । मेरि 1 हि औलद है और वो भि लरकि है । पर मेरि बिबि के मरने से पहिले मेरि लरकि कविता ने कफ़ि बार मेरे को मेरि बिबि और मैद के सथ सेक्सकरते देखा था पर उस ने कभि बतया नहि
मेरि बिबि के मरने के तेरेहविन के बाद मेरि लरकि कविता और मैन अकेले घर मैन थे और रात को हुम दोनो अकेले रूम मैन सो रहे थे । कविता घर के सारे काम कर के मेरे पस्स आ गै और मेरे बेद पर बैथ गै । मैन उस के सिर ( हेअद ) पर हथ फ़ेरने लगा और उस को पयर से बोलने लगा उस को समझया कि तेरि मा नहि है अब मैन हि तेरि मा और बाप हुन । थोरि देर तक येह कहने के बाद मैने कविता को सोने के लिये कहा ।
" पपा जि मेरे को मा कि याद आ रहि है । अकेले मैन नीनद नहि अये गि ।" मैने कविता को कहा "बेति तु मेरे सथ मेरे बेद पर सो जा 2 - 4 दिनो मैन तेरे को अदत पर जये गि और तेरे को मा कि याद भि नहि अये गि ।'" कविता मेरे बेद पर मेरे बगल मैन लेत गै मेरि तरफ़ बसक कर के ।
मेरे दिल मचल गया और मैने सोच कि येह आज अछा मौका है अगर बात बन गै तो मेरे को नै नै चुतून कि कमि नहि रहे गि । सो मैने कविता को अपनि तरफ़ किनच के अपने नजदीक कर लिया औरुस को पयर करने लगा । मैने कव कि गरदन और पीथ पर किस्सेस कि । कविता भि मेरे कफ़ि नजदीक आ गै वो तो बचि थि और नसमझ थि उस को मेरे इरदे का पता नहि था सो वो मेरे पयर को बाप का पयर समहज कर लेति रहि और बोलि " पपा जि मेरे को आप के पयर करने से अछा लग रहा है । आप मेरे को ऐसे हि पयर करो ।"
मैने कविता कि चोति सि चुचि को पकर लिया और उस कि चुत पर अपना हथ ले गया । चुत गिलि थि और थोरा थोरा खुल और बनद हो रहि थि । मैन समझ गया कि चुत मसत है और चोदने मैन कलोइ नुकसन नहि है । आज उस को बक्ष दिया तो वो कभि नहि मने गि । सो मैने उस कि पजमि उतर दि और उस कि चुर पर हथ फ़ेरने लगा और 1 हथ से उस कि चुचिअन दबने लगा । उस कि सिसकिअन निकल रहि थि । आआआअह्हह्हह्हह्हह्हाआआआआआआआ ईईईईईईईईईस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सीईईईईईईईई
ऊऊऊऊऊऊऊउम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्ममह्हह्हह्हह्हह्हह्हाआआआ
ऊऊऊऊऊऊऊओईईईईईईईईईईइम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्ममाआआआआआआ
मेरा लयरा उस कि गनद पर लग रहा था । मैने मेरे पजमा और कछे को उतर दिया । मेरा गरम लौरे 7 इनच का मेरि बेति कि गनद पर लग रहा था ।
कफ़ि देर तक उस से उपर का सेक्स करने के बाद मैने कविता को बिलकुल ननगि कर लिया और बेद पर उस को पीथ के बल लेता लिया । और उस कि चुत पर अपना 15 दिन का भुका लौरा उस कि चुत मैन धकेल दिया । वोजोर से चिल्लयी । " मरगैईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई मेरिफ़तगैईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईइ । ऊऊऊऊऊईईईईईईईईईईम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्ममाआआआआआआआआआआआअ
पर मैन रुका नहि और मैने 10 - 15 धक्के जोर जोर से कविता कि चुत मैन लगये । तब तक उस का सरद भि कम हो गया था और वोथोरा थोरा मजा ले के सिसकने लगि आआअह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह ऊऊऊऊऊऊम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मम्मह्हह्हह्हह्हह्हह्हाआआआआआआआ पपजि मेरे को थोरा थोरा मजा आ रहा हैईईईईईईईईईईईईइ
मैने कहा बेति तेरे को और भि मजा अये गा तु मसत मैन चुदा मेरे से । इस तरहा से मैने उस कू उद बार 5 मिन तक चोदा और मेरा लौरा उस कि नै नै चुत मैन खलि हो गया । मैने लुनद उस कि चुत से निकल लिया और उस को बथ रूम मैन ले गया और उस कि चुत का बलाद साफ़ किया और चुत मैन अफ़तेर शवे लोतिओन लगया बलूद बनद करने के लिये । बेति कि चुत मैन जलन होने लगि ।बलूद तोबकनद हो गया । फ़िर मैनेदोबरा उस कि चुत मैन पानि दला और जलन बनद कि ।
फ़िर हुम रूम मैन आ गये और बेद पर बेथ गये । कविता मेरि गोदि मैन थि और मेरा हथ उस कि चुचि पर। " पपा जि आप मुम्मी को भि इस तरह ऐ करते थे ? "
" नहि बेति उस को तो मैन कफ़ि जोर से चोदता था । "
" पर पपा जि आप तो मुन्नि को भि तो चोदते हो मैन कफ़ि बार देखा है और मुम्मी को भि आप से मरवते देखा है "
" अछा तो तुम हुम को चुप के देखति थि "
" हान पपा जि । मेरे को तो आज मजा आ गयक । पता हि नहि लगा कि आप ने कब मेरे को तयर कर लिया । मैन जब आप को मुम्मी या मुन्नि के सथ करते देखति थि तब मेरा भि मन करता था कि आप मेरे को भि चोदो । "
दोसतोन इस तरह हुम दोनो दोबरा से गरम हो गये और मैने कविता को मेरा लौरा चुसने को कहा और मैने उसकि चुर चुसि । सच मैन कविता को कफ़ि मजा आया औरदोबरा मेरा फ़न फ़नता लौरा कविता कि चुत मैन दल दिया । इस बार कविता को कफ़ि मजा आया औरवो मेरे लुनद कि ताल से ताल मिला के मेरि चुदै कमजा लेने लगि ।
उस के बाद तो मैने कविता को दैली चोदना सुरु कर दिया और धिरे धिरे कविता को उस कि सहिलिअन भि लने के लिये तयर कर लिया और उस कि 5 - 6 फ़रनस कि भि सेअल तोरि ।
दोअतोन उमीद है आप को मेरि कहनि अछि लगि होगि ।अगर कोइ फ़ेम येह कहनि परहति है और वो मेरे से फोने या रेअल सेक्स चति है तो मेरे को एमैल करे या मेरि chat id chutkapisu_lundgirdhari@yahoo.com पर ए मैल करे ।
कोइ अदमि मेरे से अपनि बिबि शरे करने चता है तो भि मेरे को मैल करे या ओफ़्फ़ लिने मषग दे।
माइ स्वीट गर्लफ़्रेंड

माइ स्वीट गर्लफ़्रेंड
मेरा नाम कमल है। मैं 25 साल का हूं। मेरी गर्लफ़्रेंड का नाम स्वेता है वो 22 साल की है। और उसकी फ़ीगर तो ऐसी थी की पूछो मत। वो बहुत ही सुंदर है, एकदम गोरी चिट्टी लम्बे लम्बे काले बाल, हाइट करीब 5'5" और फ़ीगर 36-25-38 है। उसका फ़ीगर मस्त है। हम दोनो घर से बाहर आगरा में एक ही रूम में रह कर पढ़ते थे। मैं ने रूम में पढ़ने के लिये कुछ गंदी किताबें रखी हुई थी। जो एक दिन स्वेता के हाथ लग गयी। इसलिये मैं अपने लंड और वो अपनी चूत की प्यास नही रोक सके। वो बोली मैं ही तुम्हारी वाइफ़ बन जाती हूं और मुझे अपनी ही समझो और मेरे साथ सेक्स करो। वो जींस शर्ट में आयी और बोली चलो शुरू हो जाओ। उसने मुझे किस करना शुरु कर दिया मेरे लिप्स को वो बुरी तरह से किस करने लगी। मैं भी जोश मे आ गया और उसको किस करने लगा। और उसको अपनी बाहों मे दबाने लगा। उसको मैं ने खींच के बेड पे लिटा दिया और मैं उसके ऊपर आ गया और उसको चूमना शुरु कर दिया। 10 मिनट तक मैं उसको चूमता रहा।
फिर मैं ने उसका शर्ट खोल दिया । उसके बाद मैं ने उसकी ब्रा भी खोल दी। जैसे ही मैं ने ब्रा खोली तो उसके दूध उछल के बाहर आ गये मैं उसे देखकर उसको दबाने लगा। कितने दिनो के बाद इसके पूरे के पूरे बूब्स देखने को और दबाने को मिले फिर मैं ने उसकी निप्पल को मुंह मे रख दिया और चूसने लगा वो आआआह्हह्हह्हह्हहाआआआह्हह्हह्हहाह्हह्हह कर रही थी। मैं उसे चूसता ही रहा थोड़ी देर बाद मैं ने उसकी जींस खोल कर उसको पैंटी पे ला दिया उसकी चूत बहुत गरम हो गयी थी तो उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैं ने पैंटी को निकाल के उसकी चूत को फैला के चाटने लगा। वो सिसकारी भर रही थि। अहाआआ अस्सस्सशहस आआआअह्हह्हह्हह्हस्सस्स स्सशाआ आआहस्सह्हस्सस अह्हह्हह्हह्हह ह्हहह्हह हस्साआ आअह्ह ह्हहा ह्हह्हाआ ह्हह्हाहह…
वो मेरे लंड को हाथ में लेकर खींच रही थी और कस कर दबा रही थी। फिर स्वेता ने कमर को ऊपर उठा लिया और मेरे तने हुए लंड को अपनी जांघो के बीच लेकर रगड़ने लगी। वो मेरी तरफ़ करवट लेकर लेट गयी ताकि मेरे लंड को ठीक तरह से पकड़ सके। उसकी चूची मेरे मुंह के बिल्कुल पास थी और मैं उन्हे कस कस कर दबा रहा था। अचानक उसने अपनी एक चूची मेरे मुंह मे ठेलते हुए कहा, चूसो इनको मुंह में लेकर। मैं ने उसकी लेफ़्ट चूची मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा। थोड़े देर के लिये मैं ने उसकी चूची को मुंह से निकाला और बोला, मैं हमेशा तुम्हारी कसी चूची को सोचता था और हैरान होता था। इनको छूने की बहुत इच्छा होती थी और दिल करता था कि इन्हे मुंह में लेकर चूसू और इनका रस पीऊं। पर डरता था पता नहीं तुम क्या सोचो और कहीं मुझसे नाराज़ न हो जाओ। तुम नहीं जानती स्वेता कि तुमने मुझे और मेरे लंड को कितना परेशान किया है? अच्छा तो आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो, जी भर कर दबाओ, चूसो और मज़े लो; मैं तो आज पूरी की पूरी तुम्हारी हूं जैसा चाहे वैसा ही करो, स्वेता ने कहा। फिर क्या था, स्वेता की हरी झंडी पाकर मैं जुट पड़ा स्वेता की चूची पर।
मेरी जीभ उसके कड़े निप्पल को महसूस कर रही थी। मैं ने अपनी जीभ स्वेता के उठे हुए कड़े निप्पल पर घुमाया। मैं ने दोनो अनारों को कस के पकड़े हुए था और बारी बारी से उन्हे चूस रहा था। मैं ऐसे कस कर चूचियों को दबा रहा था जैसे कि उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लुंगा। स्वेता भी पूरा साथ दे रही थी। उसके मुंह से ओह! ओह! अह! सी, सी! की आवाज निकल रही थी। मुझसे पूरी तरह से सटे हुए वो मेरे लंड को बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी। उसने अपनी लेफ़्ट टांग को मेरे कंधे के उपर चढ़ा दिया और मेरे लंड को अपनी जांघो के बीच रख लिया। मुझे उसकी जांघो के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ। ये उसकी चूत थी। स्वेता ने पैंटी नहीं पहन रखी थी और मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी झांटों मे घूम रहा था। मेरा सब्र का बांध टूट रहा था। मैं स्वेता से बोला, ‘स्वेता मुझे कुछ हो रहा और मैं अपने आपे मे नहीं हूं, प्लीज मुझे बताओ मैं क्या करौं? स्वेता बोली, करो क्या, मुझे चोदो, फाड़ डालो मेरी चूत को।
मैं चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए चूची मसलता रहा। उसने अपना मुंह मेरे मुंह से बिल्कुल सटा दिया और फुसफुसा कर बोली, अपनी स्वेता को चोदो’ स्वेता हाथ से लंड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखा रही थी और रास्ता मिलते ही मेरा लंड एक ही धक्के में सुपाड़ा अंदर चला गया। इससे पहले कि स्वेता सम्भले या आसन बदले, मैं ने दूसरा धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड मक्खन जैसी चूत की जन्नत में दाखिल हो गया। स्वेता चिल्लाई, उईई ईईईइ ईईइ माआआ हुहुह्हह्हह ओह रोहित, ऐसे ही कुछ देर हिलना डुलना नहीं, हाय! बड़ा जालिम है तुम्हारा लंड। मार ही डाला मुझे तुमने मेरे राजा। स्वेता को काफ़ी दर्द हो रहा था। पहली बार जो इतना मोटा और लम्बा लंड उनके बुर में घुसा था। मैं अपना लंड उसकी चूत में घुसा कर चुपचाप पड़ा था। स्वेता की चूत फड़क रही थी और अंदर ही अंदर मेरे लौड़े को मसल रही थी। उसकी उठी उठी चूचियां काफ़ी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी। मैं ने हाथ बढ़ा कर दोनो चूची को पकड़ लिया और मुंह में लेकर चूसने लगा। स्वेता को कुछ राहत मिली और उसने कमर हिलानी शुरु कर दी। फिर स्वेता बोली, अब लंड को बाहर निकालो, लेकिन मैं ने मेरा लंड धीरे धीरे स्वेता की चूत में अंदर-बाहर करने लगा। फिर स्वेता ने स्पीड बढ़ाने को कहा। मैं ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करने लगा। स्वेता को पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से कमर उठा उठा कर हर शोट का जवाब देने लगी। रसीली चूची मेरी छाती पर रगड़ते हुए उसने गुलाबी होंठ मेरे होंठ पर रख दिये और मेरे मुंह में जीभ ठेल दिया।
चूत में मेरा लंड समाये हुए तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहा था। मुझे लग रहा था कि मैं जन्नत पहुंच गया हूं। जैसे जैसे वो झड़ने के करीब आ रही थी उसकी रफ़्तार बढ़ती जा रही थी। कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी मैं स्वेता के ऊपर लेट कर दनादन शोट लगाने लगा। स्वेता ने अपनी टांग को मेरी कमर पर रख कर मुझे जकड़ लिया और जोर जोर से चूतड़ उठा उठा कर चुदाई में साथ देने लगी। मैं भी अब स्वेता की चूची को मसलते हुए ठका ठक शोट लगा रहा था। कमरा हमारी चुदाई की आवाज से भरा पड़ा था। स्वेता अपनी कमर हिला कर चूतड़ उठा उठा कर चुदा रही थी और बोले जा रही थी, “अह्हह आअह्हह्हह उनह्हह्ह ऊओह्हह्ह ऊऊह्हह्हह हाआआन हाआऐ मीईरे रज्जज्जजा, माआआअर गयययययये रीईए, लल्लल्लल्ला चूऊओद रे चूऊओद।
उईईईई मीईईरीईइ माआअ, फाआआअत गाआआयीई रीईई शुरु करो, चोदो मुझे। लेलो मज़ा जवानी का मेरे राज्जज्जा,” और अपनी गांड हिलाने लगी। मैने लगातर 30 मिनट तक उसे चोदा। मैं भी बोल रहा था, “लीईए मेरीईइ रानीई, लीई लीईए मेरा लौड़ा अपनीईइ ओखलीईए मीईए। बड़ाआअ तड़पयययययया है तूनीई मुझीई। लीईए लीई, लीई मेरीईइ स्वेताआअ ये लंड अब्बब्बब तेराआ हीई है। अह्हह्हह्ह! उह्हह्हह्हह्ह क्या जन्नत का मज़ाआअ सिखयाआअ तुनीईए। मैं तो तेरीईईइ गुलाम हूऊऊ गयीईए।” स्वेता गांड उछाल उछाल कर मेरा लंड चूत में ले रही थी और मैं भी पूरे जोश के साथ उसकी चूचियों को मसल मसल कर अपनी स्वेता को चोदे जा रहा था। स्वेता मुझको ललकार कर कहती, लगाओ शोट मेरे राज”, और मैं जवाब देता, “ये ले मेरी रनी, ले ले अपनी चूत में। “जरा और जोर से सरकाओ अपना लंड मेरी चूत में मेरे राज”, “ये ले मेरी रानी, ये लंड तो तेरे लिये ही है।” “देखो राज्जज्जा मेरी चूत तो तेरे लंड की दिवानी हो गयी, और जोर से और जोर से आआईईईईए मेरे राज्जज्जज्जजा। मैं गयीईईईईए रीई,” कहते हुए मेरी स्वेता ने मुझको कस कर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसकी चूत ने ज्वालामुखी का लावा छोड़ दिया। अब तक मेरा भी लंड पानी छोड़ने वाला था और मैं बोला, “मैं भी अयाआआ मेरी जाआअन,” और मैने भी अपने लंड का पनी छोड़ दिया और मैं हांफ़ते हुए उसकी चूची पर सिर रख कर कस के चिपक कर लेट गया। तो दोस्तो ये थि मेरी स्वेता की चुदाई की जबरदस्त कहानी।
माइ स्वीट गर्लफ़्रेंड
माइ स्वीट गर्लफ़्रेंड
मेरा नाम कमल है। मैं 25 साल का हूं। मेरी गर्लफ़्रेंड का नाम स्वेता है वो 22 साल की है। और उसकी फ़ीगर तो ऐसी थी की पूछो मत। वो बहुत ही सुंदर है, एकदम गोरी चिट्टी लम्बे लम्बे काले बाल, हाइट करीब 5'5" और फ़ीगर 36-25-38 है। उसका फ़ीगर मस्त है। हम दोनो घर से बाहर आगरा में एक ही रूम में रह कर पढ़ते थे। मैं ने रूम में पढ़ने के लिये कुछ गंदी किताबें रखी हुई थी। जो एक दिन स्वेता के हाथ लग गयी। इसलिये मैं अपने लंड और वो अपनी चूत की प्यास नही रोक सके। वो बोली मैं ही तुम्हारी वाइफ़ बन जाती हूं और मुझे अपनी ही समझो और मेरे साथ सेक्स करो। वो जींस शर्ट में आयी और बोली चलो शुरू हो जाओ। उसने मुझे किस करना शुरु कर दिया मेरे लिप्स को वो बुरी तरह से किस करने लगी। मैं भी जोश मे आ गया और उसको किस करने लगा। और उसको अपनी बाहों मे दबाने लगा। उसको मैं ने खींच के बेड पे लिटा दिया और मैं उसके ऊपर आ गया और उसको चूमना शुरु कर दिया। 10 मिनट तक मैं उसको चूमता रहा।
फिर मैं ने उसका शर्ट खोल दिया । उसके बाद मैं ने उसकी ब्रा भी खोल दी। जैसे ही मैं ने ब्रा खोली तो उसके दूध उछल के बाहर आ गये मैं उसे देखकर उसको दबाने लगा। कितने दिनो के बाद इसके पूरे के पूरे बूब्स देखने को और दबाने को मिले फिर मैं ने उसकी निप्पल को मुंह मे रख दिया और चूसने लगा वो आआआह्हह्हह्हह्हहाआआआह्हह्हह्हहाह्हह्हह कर रही थी। मैं उसे चूसता ही रहा थोड़ी देर बाद मैं ने उसकी जींस खोल कर उसको पैंटी पे ला दिया उसकी चूत बहुत गरम हो गयी थी तो उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैं ने पैंटी को निकाल के उसकी चूत को फैला के चाटने लगा। वो सिसकारी भर रही थि। अहाआआ अस्सस्सशहस आआआअह्हह्हह्हह्हस्सस्स स्सशाआ आआहस्सह्हस्सस अह्हह्हह्हह्हह ह्हहह्हह हस्साआ आअह्ह ह्हहा ह्हह्हाआ ह्हह्हाहह…
वो मेरे लंड को हाथ में लेकर खींच रही थी और कस कर दबा रही थी। फिर स्वेता ने कमर को ऊपर उठा लिया और मेरे तने हुए लंड को अपनी जांघो के बीच लेकर रगड़ने लगी। वो मेरी तरफ़ करवट लेकर लेट गयी ताकि मेरे लंड को ठीक तरह से पकड़ सके। उसकी चूची मेरे मुंह के बिल्कुल पास थी और मैं उन्हे कस कस कर दबा रहा था। अचानक उसने अपनी एक चूची मेरे मुंह मे ठेलते हुए कहा, चूसो इनको मुंह में लेकर। मैं ने उसकी लेफ़्ट चूची मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा। थोड़े देर के लिये मैं ने उसकी चूची को मुंह से निकाला और बोला, मैं हमेशा तुम्हारी कसी चूची को सोचता था और हैरान होता था। इनको छूने की बहुत इच्छा होती थी और दिल करता था कि इन्हे मुंह में लेकर चूसू और इनका रस पीऊं। पर डरता था पता नहीं तुम क्या सोचो और कहीं मुझसे नाराज़ न हो जाओ। तुम नहीं जानती स्वेता कि तुमने मुझे और मेरे लंड को कितना परेशान किया है? अच्छा तो आज अपनी तमन्ना पूरी कर लो, जी भर कर दबाओ, चूसो और मज़े लो; मैं तो आज पूरी की पूरी तुम्हारी हूं जैसा चाहे वैसा ही करो, स्वेता ने कहा। फिर क्या था, स्वेता की हरी झंडी पाकर मैं जुट पड़ा स्वेता की चूची पर।
मेरी जीभ उसके कड़े निप्पल को महसूस कर रही थी। मैं ने अपनी जीभ स्वेता के उठे हुए कड़े निप्पल पर घुमाया। मैं ने दोनो अनारों को कस के पकड़े हुए था और बारी बारी से उन्हे चूस रहा था। मैं ऐसे कस कर चूचियों को दबा रहा था जैसे कि उनका पूरा का पूरा रस निचोड़ लुंगा। स्वेता भी पूरा साथ दे रही थी। उसके मुंह से ओह! ओह! अह! सी, सी! की आवाज निकल रही थी। मुझसे पूरी तरह से सटे हुए वो मेरे लंड को बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी। उसने अपनी लेफ़्ट टांग को मेरे कंधे के उपर चढ़ा दिया और मेरे लंड को अपनी जांघो के बीच रख लिया। मुझे उसकी जांघो के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ। ये उसकी चूत थी। स्वेता ने पैंटी नहीं पहन रखी थी और मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी झांटों मे घूम रहा था। मेरा सब्र का बांध टूट रहा था। मैं स्वेता से बोला, ‘स्वेता मुझे कुछ हो रहा और मैं अपने आपे मे नहीं हूं, प्लीज मुझे बताओ मैं क्या करौं? स्वेता बोली, करो क्या, मुझे चोदो, फाड़ डालो मेरी चूत को।
मैं चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए चूची मसलता रहा। उसने अपना मुंह मेरे मुंह से बिल्कुल सटा दिया और फुसफुसा कर बोली, अपनी स्वेता को चोदो’ स्वेता हाथ से लंड को निशाने पर लगा कर रास्ता दिखा रही थी और रास्ता मिलते ही मेरा लंड एक ही धक्के में सुपाड़ा अंदर चला गया। इससे पहले कि स्वेता सम्भले या आसन बदले, मैं ने दूसरा धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड मक्खन जैसी चूत की जन्नत में दाखिल हो गया। स्वेता चिल्लाई, उईई ईईईइ ईईइ माआआ हुहुह्हह्हह ओह रोहित, ऐसे ही कुछ देर हिलना डुलना नहीं, हाय! बड़ा जालिम है तुम्हारा लंड। मार ही डाला मुझे तुमने मेरे राजा। स्वेता को काफ़ी दर्द हो रहा था। पहली बार जो इतना मोटा और लम्बा लंड उनके बुर में घुसा था। मैं अपना लंड उसकी चूत में घुसा कर चुपचाप पड़ा था। स्वेता की चूत फड़क रही थी और अंदर ही अंदर मेरे लौड़े को मसल रही थी। उसकी उठी उठी चूचियां काफ़ी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी। मैं ने हाथ बढ़ा कर दोनो चूची को पकड़ लिया और मुंह में लेकर चूसने लगा। स्वेता को कुछ राहत मिली और उसने कमर हिलानी शुरु कर दी। फिर स्वेता बोली, अब लंड को बाहर निकालो, लेकिन मैं ने मेरा लंड धीरे धीरे स्वेता की चूत में अंदर-बाहर करने लगा। फिर स्वेता ने स्पीड बढ़ाने को कहा। मैं ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से लंड अंदर-बाहर करने लगा। स्वेता को पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से कमर उठा उठा कर हर शोट का जवाब देने लगी। रसीली चूची मेरी छाती पर रगड़ते हुए उसने गुलाबी होंठ मेरे होंठ पर रख दिये और मेरे मुंह में जीभ ठेल दिया।
चूत में मेरा लंड समाये हुए तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहा था। मुझे लग रहा था कि मैं जन्नत पहुंच गया हूं। जैसे जैसे वो झड़ने के करीब आ रही थी उसकी रफ़्तार बढ़ती जा रही थी। कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी मैं स्वेता के ऊपर लेट कर दनादन शोट लगाने लगा। स्वेता ने अपनी टांग को मेरी कमर पर रख कर मुझे जकड़ लिया और जोर जोर से चूतड़ उठा उठा कर चुदाई में साथ देने लगी। मैं भी अब स्वेता की चूची को मसलते हुए ठका ठक शोट लगा रहा था। कमरा हमारी चुदाई की आवाज से भरा पड़ा था। स्वेता अपनी कमर हिला कर चूतड़ उठा उठा कर चुदा रही थी और बोले जा रही थी, “अह्हह आअह्हह्हह उनह्हह्ह ऊओह्हह्ह ऊऊह्हह्हह हाआआन हाआऐ मीईरे रज्जज्जजा, माआआअर गयययययये रीईए, लल्लल्लल्ला चूऊओद रे चूऊओद।
उईईईई मीईईरीईइ माआअ, फाआआअत गाआआयीई रीईई शुरु करो, चोदो मुझे। लेलो मज़ा जवानी का मेरे राज्जज्जा,” और अपनी गांड हिलाने लगी। मैने लगातर 30 मिनट तक उसे चोदा। मैं भी बोल रहा था, “लीईए मेरीईइ रानीई, लीई लीईए मेरा लौड़ा अपनीईइ ओखलीईए मीईए। बड़ाआअ तड़पयययययया है तूनीई मुझीई। लीईए लीई, लीई मेरीईइ स्वेताआअ ये लंड अब्बब्बब तेराआ हीई है। अह्हह्हह्ह! उह्हह्हह्हह्ह क्या जन्नत का मज़ाआअ सिखयाआअ तुनीईए। मैं तो तेरीईईइ गुलाम हूऊऊ गयीईए।” स्वेता गांड उछाल उछाल कर मेरा लंड चूत में ले रही थी और मैं भी पूरे जोश के साथ उसकी चूचियों को मसल मसल कर अपनी स्वेता को चोदे जा रहा था। स्वेता मुझको ललकार कर कहती, लगाओ शोट मेरे राज”, और मैं जवाब देता, “ये ले मेरी रनी, ले ले अपनी चूत में। “जरा और जोर से सरकाओ अपना लंड मेरी चूत में मेरे राज”, “ये ले मेरी रानी, ये लंड तो तेरे लिये ही है।” “देखो राज्जज्जा मेरी चूत तो तेरे लंड की दिवानी हो गयी, और जोर से और जोर से आआईईईईए मेरे राज्जज्जज्जजा। मैं गयीईईईईए रीई,” कहते हुए मेरी स्वेता ने मुझको कस कर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसकी चूत ने ज्वालामुखी का लावा छोड़ दिया। अब तक मेरा भी लंड पानी छोड़ने वाला था और मैं बोला, “मैं भी अयाआआ मेरी जाआअन,” और मैने भी अपने लंड का पनी छोड़ दिया और मैं हांफ़ते हुए उसकी चूची पर सिर रख कर कस के चिपक कर लेट गया। तो दोस्तो ये थि मेरी स्वेता की चुदाई की जबरदस्त कहानी।
बड़ा चोदक्कड़ गुजरात ओनली

बड़ा चोदक्कड़ गुजरात ओनली
Hi, I am Kalp from Gujarat. Today I am going to narrate my true incident with my girlfriend. First I introduce my self. My name is Ravi, age 21 year and my girl friend is Geetu, 20 year old. Now I tell my story in Hindi. हमारी दोस्ती को हुए 1.5 साल हो गया था पर मैने उसे अब तक छुआ तक नहीं था। एक दिन जब हम रोक गार्डन गये हुए थे तो मैं उसे सिर्फ़ किस ही किया और जब मैं उसके बूब्स पर हाथ लगाने लगा तो वो गुस्सा कर गई और कम से कम एक महीने मुझसे बात नहीं की, आखिर मैने भी उसे एक दिन मना ही लिया और उसको कहा के ये सब तो चलता रहता है तो वो बोली के मेरे को ये सब अच्छा नहीं लगता तो मैने कहा के अच्छा नहीं लगता तो नहीं करूंगा, उस दिन के बाद हम दोनो मिलते तो थे पर किस तक ही सीमित थे, पर अब मेरे से सब्र नहीं होता था और मैं उसे चोदने की योजना बनाने लगा। फिर एक बार जब मैं गरमियों में उससे मिलने गया तो वो बोली कि आज तुम ओफ़िस से छुट्टी कर लो आज बैठ के बातें करेंगे, तो मैने ओफ़िस फोन कर के बोल दिया के आज मैं नहीं आउंगा, उसके बाद हम दोनो कुछ देर उसके कोलेज में ही बैठे रहे। फिर मैने उससे पूछा कि कहीं चलते हैं तो वो भी मान गयी पर उस टाइम 12.40 बज रहे थे उस टाइम न तो हमें फ़िल्म का टिकट मिलना था न ही हम किसी गार्डन में जा सकते थे क्योंकि दिल्ली में अधिकांश 12:30 तक सारे सिनेमा में शो स्टार्ट हो जाते हैं और गार्डन में इसलिये नहीं जा सकते हैं क्योंकि वहां पर गर्मी बहुत होती है।
फिर मैने कहा के मेरे रूम पर चलते हैं पर वो मना कर रही थी कह रही थी कि मुझे डर लगता है कि कही कुछ हो गया तो, पर मैने उसे तसल्ली दी और कहा कि अगर तुम्हे मुझ से प्यार है और अगर तुम मुझ पर भरोसा करती हो तो चल सकती। इस पर वो बोली कि तुम मेरी कसम खाओ के तुम ऐसा वैसा कुछ नहीं करोगे मैने उसकी कसम खा ली और वो तैयार हो गई। रास्ते में सोचता रहा के कसम तो खा ली पर उसको चोदुंगा कैसे। फिर जब मैं और वो मेरे रूम पर पहुंचे तो मैने दरवाजा बंद करने लगा, तो वो बोल पड़ी के दरवाजा क्यों बंद कर रहे हो मैने कहा कि अगर कोई देख लेगा तो क्या कहेगा कि कौन है और मैने दरवाजा बंद कर दिया। उसके बाद मैं बेड पर उसके साथ बैठ गया और बातें करने लगे, बातें करते करते मैने उसके कंधे पर हाथ रखा और उसके लिप्स पर किस करने लगा पर ये किस 15 मिनट तक चलता रहा और मैं उसकी छाती पर हाथ फिराना शुरु कर दिया उसने विरोध नहीं किया और धीरे धीरे मैं उसकी वेली से होता हुआ उसकी चूत को सलवार के ऊपर से हाथ सहलाने लगा। अब मेरे लिप्स उसके लिप्स से किस कर रहे थे और एक हाथ उसके बूब्स पर और एक हाथ उसकी चूत पर था। अब मैं धीरे धीरे उसकी गर्दन और उसके बाद उसके बूब्स को कमीज के ऊपर से चूसने करने लगा तो उसके मुंह से अजीब से आवाजें आने लगी तो मैं समझ गया कि अब वो गरम हो चुकी है उसके बाद मैने धीरे धीरे एक हाथ कमीज के अन्दर डाल दिया और ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स को दबाने लगा।
बाद में मैने उसकी कमीज उतार दिया वो कुछ नहीं बोली क्योंकि वो पूरी तरह गरम हो चुकी थी। उसने सेक्सी लेस काली ब्रा पहन रखी थी और वो अपने बूब्स अपने दोनो हाथों से छुपाने लगी, मैं समय न गंवाते हुए उसे दोबारा किस करना शुरु कर दिया और उसकी ब्रा के ऊपर से बूब्स को सहलाता रहा फिर उसकी पीठ पर हाथ ले जा के उसकी ब्रा के हुक भी खोल दिये। अब वो मेरे सामने बिल्कुल टोपलेस थी। मैने उसे बेड पर लिटाया और उसके बूब्स चूसने लगा। 20 मिनट तक उसके बूब्स चूसने के बाद मैने उसकी सलवार की तरफ़ हाथ बढ़ाया और उसका नाड़ा खोल दिया और उसके बूब्स को चूसना चालू रखा। उसके मुंह से अजीब अजीब से आवाजें आ रही थी, मैने सोचा कि कहीं पड़ोसी सुन लेंगे तो प्रोब्लम हो जायेगी इसलिये मैने उसके बूब्स चूसते हुए सीडी का बटन ओन कर दिया अब म्युज़िक जोर से बजने लगा और किसी को कुछ सुनाई देने का तो नाम ही नहीं था। अब मैने उसकी सलवार धीरे धीरे उतारनी शुरु कर दी। उसकी सलवार उतारने के बाद मैं उसकी चूत को उसकी काली पैंटी के ऊपर से चूमने लगा। तो वो और जोर से सिसकियां लेने लगी। धीरे धीरे मैने उसकी पैंटी को भी उतार दिया और उसकी चूत को चूमने लगा।
अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी पड़ी हुई थी और कुछ बोल भी नहीं रही थी। मैं लगभग 10 मिनट तक उसकी चूत को चूसता रहा और जैसे ही उसकी चूत झड़ने वाली थी मैने चाटना छोड़ दिया तो वो बिना पानी की मछली की तरह तड़ओ उठी और खुद ही अपनी उंगली चूत में डालने लगी मैं उसके दोनो हाथ कस के पकड़ लिया तो वो मेरे आगे गिड़गिड़ाने लगी कि प्लीज़ मेरी चूत को चूसो तो मैने कहा सालि पहले तो बहुत अकड़ती थी आज क्यों नहीं अकड़ रही है, तो वो दोबारा गिड़गिड़ाने लगी। मैने उससे कहा कि मैने तुम्हारी चूत एक शर्त पर चूसुंगा पहले तुम्हे मेरा लंड चूसना होगा वो मान गयी और मैने उसे मेरे कपड़े उतारने को कहा तो वो जल्दी जल्दी मेरे कपड़े उतार दिये और मेरे 7 इंच और 3.5 इंच मोटे लंड को देख कर बोली कि ये मेरे मुंह में कैसे आयेगा तो मैने कहा कि साली मैं बताता हूं और मैने अपना लंड उसके मुंह मैने थोड़ा सा डाल दिया उसके बाद धीरे धीरे वो खुद ही बढ़ाती गयी और मेरे पूरे लंड को मुंह में डाल के चूसने लगी। और उसका एक हाथ मेरे बाल्स के साथ खेल रहा था। और मैं उसके बूब्स के साथ खेल रहा था। थोड़ी देर चूसने के बाद वो वोली कि अब तुम मेरी चूत चूसो तो मैने कहा कि चलो 69 की पोजिशन में हो जाओ तो वो बोली के वो क्या होता है तो मैने उसे बताया कि 69 क्या होता है और इस तरह हम दोनो 69 की पोजिशन में आ गये और एक दूसरे को चूसने लगे। बीच बीच में उसकी चूत में उंगली भी डाल रहा था तो वो कह रही के दर्द होता है। और 10 मिनट के बाद वो झड़ गयी और मैं उसका जूस पी गया। मुझे अच्छा लगा और मैं उसकी चूत को चूसता रहा, उसके बाद वो दोबारा गरम हो गई और जैसे ही मैने चूसना बंद किया तो वो दोबारा गिड़गिड़ाने लगी कि चूसो।
तो मैने कहा के अब मैं नहि चूसुंगा बल्कि तुम्हारी चूत में लंड डालुंगा तो वो कहने लगी कि इतना बड़ा मेरी चूत में कैसे जायेगा, मुझे तो तुम्हारी उंगली से भी दर्द होता है तो ये कैसे सहन करूंगी तो मैने उसे कहा कि तुम्हे डरने की जरूरत नहीं है थोड़ी देर दर्द होगा बाद में तुम भी एंजोय करोगी और मैने कहा कि ये औरतों की चूत का होल बहुत बड़ा होता है क्योंकि यहां से इतना बड़ा बच्चा निकल जाता है तो मेरा लंड तो आराम से आयेगा। उसके बाद मैने तेल लेके थोड़ा से अपने लंड पर और बाकी उसकी चूत के लिप्स को हटा कर वहां पर लगा दिया। और अपना लंड उसकी चूत में अंदर डालने की बजाय लिप्स पर ही रगड़ने लगा तो वो थोड़ी देर में ही चिल्ला उठी प्लीज़ अंदर करो। उसके बाद मैने थोड़ा सा अन्दर किया तो वो दर्द से चिल्लाने लगी, तो मैने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये और अपने लंड को वहीं पर रख कर थोड़ा सा हिलाने लगा जब वो एंजोय करने लगी तो मैने एक जोर से झटका दिया और मेरा लंड उसकी चूत में चला गया और वो दर्द से तड़पने लगी। पर मेरे सब्र का बांध टूट चुका था और मैने उसकि परवाह न करता हुए अपने लंड को अन्दर बाहर करने लगा। वो थोड़ी देर दर्द महसूस करती रही पर बाद में वो भी एंजोय करने लगी और उसके मुंह से आवाजें आने लगी "आअह्हह्हह ओर जोर से चोदो रवि और जोर से और अन्दर करो" तो मैने कहा क्यों ये सब तो तेरे को अच्छा नही लगता था साली अब लंड का स्वाद आ रहा है न। तेरी तो आज मैं पूरी फाड़ दूंगा। और लगभग 15 मिनट की चुदाई के बाद मेरा छूटने वाला था (इस बीच वो दो बार चूत चुकी थी)।
मैने उसको कहा कि मैं झड़ने वाला है और उससे पूछा कि अन्दर छोड़ु कि बाहर, तो उसने बोला के बाहर ही छोड़ना मैं प्रिगनेंट नहीं होना चाहती है और मैने उसकी चूत से लंड निकाल कर उसके मुंह में डाल दिया और mouth fuck करने लगा। थोड़ी देर में मैं झड़ गया। उसका मुंह मेरे वीर्य से भर गया। कुछ तो उसने निगल लिया और बाकी बाहर उसके चेहरे से होता हुआ उसकी गरदन पर गिर गया। उसके बाद मैं थोड़ी देर उसके ऊपर लेट गया और उसको किस करता रहा और अपने माल को उसके बूब्स पे मलता रहा। लगभग 15 मिनट रेस्ट करने के बाद हम दोनो उठे और अब शाम होने लगी थी और उसने घर भी जाना था तो हम दोनो ने अपने आप को फ़्रेश किया। और उसको घर के पास छोड़ कर आ गया। आके मैने उसके खून और हम दोनो के रज से खराब हुई बेडशीट को साफ़ किया। All u sexy and horny girls from gujarat can mail me and I will reply u all, but only serious girl who want sex and excitement in their life can mail me.our relation ship will be secretly maintained. Hope next time some new sexy girl will be there in my story. It should be a secret relationship, nobody other than you and me should know about us, ok. Your e-mail address will be kept strictly confidential. My EMAIL: pkalpesh2002@yahoo.co.in
भाभी की जमकर गांड मारी

भाभी की जमकर गांड मारी
मैं शर्मीला हीरो पटना बिहार से एक स्टोरी लेके आया हूं। जवान औरत से सेक्स करना और औरत को चोदना हर जवान लड़के का सपना होता है। मेरा भी था कि किसी अल्हड़, मस्त, जवान औरत की गांड और चूत मारी जाये और उसकी गांड में ज़बान डाल कर उसका रस चखा जाये। औरत की भरी-भरी कसी-कसी उठान लिये ब्लाउज़ में कैद दूध से भरी चूचियां हमेशा हिलते हुए मुझे अपनी ओर अकार्षित करती और मैं उनको दबाने के सपनो में खो जाता कि कब ब्लाउज़ के बटन खोल उन चूचियों को आज़ाद करुंगा, ब्लाउज़ के हुक खोल कर, ब्रा को हटा कर, दोनो चूचियां अपने हाथों में लेकर दबाउंगा। कब औरत के बूब्स, स्तन मेरे हाथों में आयेंगे? कब मैं भी उन निप्पलों को मुंह में लेकर पी पाउंगा? मोहल्ले की हर जवान, गोरी, सुन्दर और प्यारी भाभी के बारे में सोचता रात को ये कितना मज़ा लुटवाती होंगी और लंड की सवारी कर रोज़ जन्नत घूमने जाती होंगी। हर भाभी भी मुझसे बहुत घुली-मिली थी, कभी भी कोई काम होता तो उनका ये देवर हमेशा काम करने को तैयार रहता था।
एक बार मेरे एक दूर के भैया हमारे यहां अपनी बीवी के साथ रहने आये। बात एक रात की है कि मुझे गरमी के कारण नींद नही आ रही थी। हम ऐसे ही बाहर आंगन में निकल आ गये। सामने बेडरूम की खिड़की से हल्की ट्यूब लाइट की रोशनी बाहर आ रही थी क्योंकि खिड़की के कांच पर कपड़ा पड़ा था। परन्तु खिड़की का एक दरवाज़ा हल्का टेढ़ा खुला था ताकि साफ़ हवा कमरें में आ जा सके। मैने सोचा ये भैया क्या पढ़ रहे हैं? मैने बस हल्के से दबे पांव पास जाकर खिड़की के नीचे से अन्दर देखा तो मेरी सांस जैसे रुक गयी। भाभी पूरी नंगी होकर पेट के बल लेटी थी और उनकी मस्त, मांसल गांड ऊपर की ओर थी। भैया उनकी पीठ पर सरसों के तेल से मसाज कर रहे थे साथ-साथ वो उनके चुतड़ की भी मसाज कर रहे थे। भाभी हल्के-हल्के मुंह से अह्हह्हह्हह।।।स्सस्सस्स। अह्हह्हह।। कर रहीं थी। ह्हह्हह्हह्हम्मम्मम्म।।म्मम्मम्मम्म।।ऊऊ। और जब भैया तेल लगा कर अपनी उंगली भाभी के चूतड़ को फैला कर गांड में अन्दर घुसा डालते तो भाभी कह उठती, "धीरे-धीरे डालो बाबा दर्द होता है।" भैया लुंगी पहने अपने दोनो हाथो से उनके ऊपर जांघो पे बैठ कर दोनो चूतड़ों की मालिश कर रहे थे। गांड की मालिश से भाभी बहुत खुश नज़र आ रही थी। भाभी के उल्टा हो लेटने से मैने देखा, कि भैया हल्के से लेट कर पीछे से उनकी गांड में अपनी ज़बान भी लगा रहे थे, जिस से भाभी आआह्हह।।। ऊ।। करती जाती फिर पीछे से ही भैया ने भाभी के जांघों को को फैलाया जिससे उनकी चूत भी दो फांकों में बंट गयी
पेहला सेक्स

हेल्लो। मैन रिचा हून पतिअला से। मैन बतेच कि सतुदेनत हून। मैन आपको अपनि कहनि बतने जा रहि हून जो मेरे सथ उस समय बीति जब मैन 12थ सलस्स के एक्समस देकर फ़री हुयी थि। मेरे परेनतस अरे गोवत। एमपलोयी हैन। इस लिये मैन घर मैन अकेलि रेहति थि। हमरा एक नौकर जिसका नाम कल्लु है, भि हमरे सथ रेहता है। उसकि उमर करीब 30 साल है और वूह एक अछा सेहत मनद और तकतवर आदमि है।। एक दिन मैन अकेलि बैथि थि। परेनतस अभि अभि ओफ़्फ़िसे गये थे। कल्लु मेरे पास अया और केहने लगा, कया कर रहे हो। मैन बोलि, कुछ भि तो नहिन। वूह बोला, मेम सहिब अगर बुरा ना मनो तो एक बात बोलून। मैन बोलि, कहो।। उसने कहा, मेम सहिब आज मुझे अपनि घर वलि कि बहुत याद आ रहि है। उसकि घरवलि नेपल के गऔन मे रेहति है। मैने कहा, बोलो मैन कया कर सकति हून। वहो बोला मेम सहिब मेरे सथ थोरि देर बात कर लेन। इस्से मेरा जी थोरा हलका हो जयेगा। मैने कहा, नो परोबलेम। मैन उसके घर परिवर के बरे मैन पुछने लग गयी। बातोन बातोन मैन वोह बोला मेम सहिब हुम अपनी विफ़े के सथ बहुत मज़ा लेते हैन। मैने बोलि, तुम कया बात कर रहे हो। कौन सा मज़ा लेते हो? वहो बोला मेम सहिब सेक्स का बहुत मज़ा लेते हैन। मैन पूछ बैथि, येह सेक्स मैन कया मज़ा होता है। उसने कहा, मेम सहिब आज आपको पूरि देतैल मैन समझता हून। फिर उसने कहा, पेहले मैन उसके सारे कपरे उतर देता हून, फिर उसके सारे शरिर को छूमता हून, फिर उसके बदन पर अपना हाथ फिरता हून, ऐसा करने से वूह भि मसत हो जाती है। मैन फिर उसके मम्मे चूसता हून। मैने उसको तोक दिया, मुझे कुछ भि समझ नहिन आ रही है। वहो बोला मेम सहिब फ़िकर नोत, मैन आपको परसतिसल करके बतता हून। इस्से पेहले मैन कुछ समझ सकति वूह मुझे चूमने लगा। मैने उसको एक जबरदसत धक्का दिया और वूह दूर जकर गिरा। वूह मेरे पास आया और बोला आज तो मैन तुमहे नहिन छोदुनगा। उसने मुझे बालोन से पकर लिया और अफि तरफ़ खीनच लिया। मैन उस दिन सकिरत तोप पेहने थि। उसने मेरे दोनो हाथो को पकर लिया और एक हाथ से पीथ के पीछे अपने एक हाथ से कस दिये। और वूह मेरे लिपस को चूसने लगा। उसकि सानसो से शरब के समेल्ल आ रहि थि। मैन उस्से छूतने के लिये जोर लगा रहि थि पर वूह एक तकतवर आदमि था। वूह बोला रिमपि मेम सहिब, तुमहरे लिपस बहुत रसदार हैन। इतने रसभरे लिपस तो मेरि घर वलि के भि नहिन हैन। इ सैद, कल्लु बहुत हो गया। अब मुझे छोद दो वरना मैन तुमहरा बहुत बुरा हाल करवऊनगि। वहो बोला मेम सहिब, मैन आज 4 बजे कि गादि पकर कर निकल जऔउनगा। तुम लोग मुझे धूनधते हि रह जओगे। पर जने से पेहले मैन तुमहरि अछि तरह चुदै करना चहता हून। अब मैन बुरि तरह दर गयी और छूतने के लिये जोर लगने लगी। अचनक मेरा एक हाथ उसकि गिरफ़त से छूत गया और मैने उसके एक जोरदर पुनच लगा दिया। वहो बोला मेम सहिब, तुमहरे हाथ तो सिरफ़ पयर करने के लिये हैन। उसने मुझे पीथ के पीछे से पकर लिया और मुझे लेकर सोफ़ा पर बैथ गया। मैन उसकि गोद मैन बैथि थि। उसने अपने हाथ मेरे पैत पर चलना शुरु कर दिया। फिर धीरे धीरे वूह अपना हाथ को उपर मेरि छति पर लने लगा। मैन भि उस्से बचने के लिये जोर लगने लगी और उसके हाथोन को पिछे करने लगी। अचनक उसका हाथ मैरि छति पर आ गया। वूह मेरि छति को कस कर दबने लगा। येह मेरे लिये बहुत पैनफ़ुल था। मैन चिल्लये, ऊऊऊईईईईईई छोद दो मुझे, पर उसने मेरे मम्मो को मसलना जरी रखा। फिर दूसरे हाथ से उसने मेरे तोप का बुत्तोन खोल दिया। वहो अपना हाथ तोप के अनदर ले गया। और मेरे मम्मोन को दबने लगा। जीवन मैन पेहलि बार किसि का हाथ मेरे मम्मोन पर लगा था। कुछ समय के लिये उसका तौच मुझे अछा लगा पर वूह बहुत जोर जोर से दबा रहा था। मुझे दरद भि बहुत हो रहा था। फिर उसने मेरे निप्पले को धूनध कर उसे मसलना शुरु कर दिया। अब मेरे तन बदन मैन एक मसति सि छनि शुरु हो गयी थि। पर वूह इस्से अनजन था। थोरि देर के बद उसने अपने दूसरे हथ से मेरे तोप को थोरा उपर उथया और फिर दोनो हाथोन से एक झतके साथ तोप को उतर कर फैनक दिया।। फिर उसने मेरि बरा के सत्रप नीचे कर दिये और मेरे मम्मे बरा से बहर आ गये। उसने दोनो मम्मोन को पकर लिया और धीरे धीरे दबने लगा। पर अब मैन कोइ सत्रुग्गले नहिन कर रहि थि। उसने मुझे खरा किया और मेरि सकिरत का हूक खोल दिया और एक झतके के सथ मेरि सकिरत और पनती को उतर दिया। इस तरह उसने मुझे पूरि तरह ननगि कर दिया। फिर उसने अपनि शिरत और लुनगि खोल दी। वहो भि पूरि तरह ननगा था। उसका शरिर बहुत सत्रोनग था और उसका लुनद करीब 9 इनच का था और करीब 2 इनच मोता था। मैन उसे देख कर बहुत दर गयी। उसने मुझे पकर कर बेद पर लिता दिया और मेरे उपर सवर हो गया। पेहले उसने मेरे सरे शरिर को चूमा फिर उसने मेरे मम्मो को दबया फिर उनहे अपने मूह मैन लेकर बरि बरि चूसने लगा। एक मसति का एहसास मेरे दिलो दिमग पर हावि होने लगा। मेरि चूत मैन एक मसति भरि खरिश होने लगी। मेरे निप्पले तन कर खरे हो गये थे। उसने अपना लनद मेरि चूत पर तिका दिया और एक झतका लगा दिया। लुनद थोरा सा अनदर चला गया। मैन चीख परि, आआयययययीईईईईईईएआआआआआआआआआआआआआह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हहऊऊऊऊऊओह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्हहैईईईईईईई माआआअर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्र गाआआयययययीईईईईईईईईईईईईईनाआअह्हह्हह्हह्हीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईइन्नन्नफिर उसने एक जोरदर झतका मर दिया और लनद करीब अधा अनदर चला गया। मेरि सील भि तूत गयी। मेरि चूत से खून बेहने लगा। मैन चीखना चहति थि पर उसने मेरे लिपस को अपने लिपस मैन लेकर दबा रखा था। वहो बोला मेम सहिब तुम बहुत मसत हो। आज तुमहरि सेअल तोरने मैन मज़ा आ गया। उसने एक और जोरदर झतका लगया और उसका लुनद पूरि तरह मेरि चूत मैन घुस चुका था। मैन चीखना चहति थि पर चीख नहिन सकति थि। मैरि आनखो से आनसु तपक रहे थे। वहो बोला थोरि देर रुक जता हून। फिर उसने मेरे मम्मोन को चूसना शुरु कर दिया। इस्से मुझे बहुत आरम मिला और मेरा दरद कम हो गया। फिर उसने धीरे धीरे लुनद को अनदर बहर करना शुरु कर दिया। फिर दरद कि एक लेहर उथि पर अब साथ मैन मज़ा भि आ रहा था। कुछ देर बाद दरद पूरि तेरह खतम हो गया। अब तो बस मज़ा हि मज़ा था। उसने पूरि मसति के सथ मेरि चुदै कि। मैने भि अपनी गानद को उथा कर उसका सथ दिया। थोरि देर के बद मैन ओवेर हो गयी। पर वूह अभि तक पूरि जोर से चुदै कर रहा था। उसने मेरि तानगे उपर उथा दि। फिर उनको लेफ़त घुमा दिया और मेरि गानद से पकर कर मुझे घोरि बना दिया। इस पोसितिओन मैन मुझे बहुत मज़ा आया और मैन एक बार फिर से सलिमक्स तक पहुनच गयी। पूरे ओने हौर कि चुदै के बाद वूह थनदा हुअ। 15 मिनुते के बद उसने फिर से मुझे पकर लिया और मेरि चूत को चातने लगा। उसने अपने तोनगुए मेरि चूत के अनदर घुसा दी। मैन फिर से अननद के सगर मैन गोते लगने लगी। अब कि बार उसने मुझे लिता दिया और अपना लुनद मेरे मूनह मैन दाल दिया। और तोनगुए से मेरि चूत को चातने लगा। इस तेरेह मैन एक बार फिर ओवेर हो गयी। अब कि बार उसने मुझे बेद के सहरे खरा कर दिया और मेरि गानद मैन अपना लनद गुसेर दिया। उस्से मुझे बहुत जयदा दरद हुया। करीब हलफ़ हौर तक पुमप करने के बाद वूह थनदा हो गया। मेरा एक एक अनग दुख रहा था। उसके बाद उसने 330 तक मेरि पानच बार चुदै कि और फिर जलदि से अपने कपरे लेकर भग गया। जते जते उसने कहा, मेम सहिब मैन आपको हमेशा याद रखूनगा। तुम मेरि सेक्स कि देवि हो। जो मज़ा तुमने मुझेदिया है वूह आज तक किसि भि औरत मैन नहिन है। उस दिन के बद येह बात मैने किसि को भि नहिन बतयी, पर मैन अपनि पेहलि चुदै को हमेशा याद रखुनगि। सच मैन, मैने भि इसमे कफ़ी मज़ा लिया था।
मेरी उधार की छात्रा

नाम ओमेंद्र है लोग मुझे प्यार से ओम बुलाते हैं। यह कहानी तब की है जब मैं 12 में पढ़ रहा था। मेरे पड़ोस में एक लड़की रहती थी जिसका नाम रीना था वो हमेशा मेरे घर सवाल पूछने के लिये आती थी।(क्योंकि मैं अपने क्लास में सबसे तेज लड़का था)। उसके घर से जाने के बाद में हमेशा उसीके बारे में सोचता रहता था। एक दिन जब मेरे घर के लोग मेरी सिस्टर के लिये लड़का देखने गये थे तो वह मेरे पास आई उस दिन मेरा इरादा उसे चोदने का था इसलिये मैं पढ़ाई के बजाय उस दिन उससे बातें ही करता रहा और इसी बीच मैंने उससे अपने प्यार का इज़हार कर दिया इस पर वो बोली ओम मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूं लेकिन डर के कारण मैंने यह बात तुमसे कभी कही नहीं। उसके इतना कहने पर मैंने अपना हाथ उसके गोल चूचियों पर रख दिया और उसे मसलने लगा और उसके मुँह से उफ़......की आवाज़ निकलने लगी फिर धीरे-2 मैंने उसकी शलवार और समीज दोनो निकाल दी और इसके बाद एक गजब का दृश्य मेरे सामने था। सबसे पहले तो मैंने उसकी न देखी गई चूत और गांड को काफी देर तक देखता रहा फिर जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने उसकी चूत पर अपना हाथ रखकर उसे मसलना स्टार्ट कर दिया फिर वो भी आनंद लेते हुये आह उह ....करने लगी और बोली ओम मेरी चूत को फाड़ दो इसे जन्नत में पहुंचा दो फिर मैं मसलते हुये अपना मुँह उसकी भीगी हुयी चूत पर सटा दिया तो वो एकदम से बेचैन हो गयी और अपनी कमर को इधर उधर घुमाने लगी तथा गांड को उछालने लगी तब मैं समझ गया कि यही असली मौका है चूत में लंड डालने का फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत में डालना चालु किया क्योंकि चूत पहले से गीली थी इस कारण वो एक ही झटके में अंदर चला गया और वो बिल्कुल से चिल्ला उठी धीरे करो कितना बडा है तुम्हारा लौड़ा यह तो मेरी चूत ही फाड़ डालेगा फिर मैंने धीरे-2 इधर उधर करने लगा थोड़ी देर के बाद उसने स्पीड को फ़ास्ट करने के लिये कहा और फिर अपने को और फ़ास्ट किया मैंने वो आह ऊह स्सस्सस्सस्सस्सस्सस करती जा रही थी उसे काफी तेज दर्द हो रहा था लेकिन जोश में होने कारण उसे दर्द का एहसास कम हो रहा था हम दोनो और फ़ास्ट हो गये और फिर अचानक महसूस हुआ कि उसकी चूत से कुछ गरम-2 निकलता हुआ लगा तो मैं समझ गया कि वो झड़ गयी और उस समय उसकी स्पीड भी नोर्मल हो चुकी थी फिर मैने भी तेजी के साथ करते हुये अपना पानी गिरा दिया और उसकी चूची पर मुँह रख कर कुछ देर तक पड़ा रहा फिर हम दोनो उठे उससे उठा नहिन जा रहा था तो मैंने उसे हेल्प किया फिर मैंने देखा कि जमीन पेर काफी ज्यादा ब्लड गिरा था फिर मैंने पानी लाकर उसे झाड़ु से साफ कर दिया और उस दिन से मेरी उसकी स्टोरी लगभग 3 साल तक चली और अब उसकी शादी हो चुकी है और वो दो बच्चों की माँ भी है।
Wednesday, April 23, 2008
नशीली चूत का रस

नशीली चूत का रस
Hi. This is मी , a playboy. I am a regular reader of sexy Indian stories posted on ISS.net. It is a great sexy site indeed and I know u all guys and gals will agree with me in toto. I am a Playboy. U know who is called a Playboy, one who gets money and gifts from unsatisfied aunties, wives and bhabhees whom vaginal itch (choot ki khujli) and vaginal sex fire (choot ki aag) gets extinguished by a natural fire brigade (Lauda) fire fighter called Penis in English and which we often call as “Land”, “Lauda”, in slang and language used by all Harami girls and boys.
God has gifted each man with a healthy Land but only a few are lucky to have Land measuring 6 inches and more with good thickness measuring 3 inches and more in circumference (motai or golai) what u call. I am thankful to God that he has blessed me with a 7 inches long and teen angul mota Land by with which I am able to satisfy many women and more than 35 so far.
It is indeed a pleasure to see yourself naked in front of a mirror. Mirror image of your Land makes u feel proud that u possess a great asset.
लंड जिसकी कल्पना सबसे ज़्यादा कुंवारी लड़कियां करती हैं और हर रात उसके रंगीन सपने देख कर अपनी चूत में उंगली डाल कर उसकी खुजली शांत करने की कोशिश करती हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ कुंवारी कन्या ही लौड़े को तरसे हैं, जवान शादी-शुदा औरत भी अच्छी तगड़े मोटे लंड को पाने के लिये बेकरार रहती हैं।
खैर, ये तो हुई सामांय ज्ञान की बात अब ज़रा गुप्त ज्ञान की बात हो जाये। भाई, बात उन दिनो की है जब मैं 12th की बोर्ड की परीक्षा देकर फ़्री हुआ था और रिजल्ट आने में तीन महीने का समय था। ये वो समय होता है जब हर लड़का अपने बढ़े हुए लंड के प्रति आकार्षित रहता है साथ-साथ बढ़ती हुई काली-काली घुंघराली झांटे उसका मन जल्दी से किसी नशीली चूत का रस पान करने को प्रेरित करती हैं। मैने फ़्री टाइम को सही इस्तेमाल करने के लिये एक इंगलिश स्पीकिंग कोर्स ज्वाइन कर लिया। हमारे घर से थोड़ी दूर पर एक नये इंगलिश कोचिंग सेंटर खुला था जहां मैं अपना एडमीशन लेने पहुंच गया। मेरे लौड़े की किस्मत अच्छी थी वहां जाते ही मेरा सामना एक कमसिन, अल्हड़, मदमस्त, जवान, औरत से हुआ जो पता चला वहां की टीचर है। उसके गोरे-गोरे तन बदन को देखते ही मेरा तो लौड़ा चड्ढी में ही उचकने लगा। उसकी खुशबूदार सांसो ने मन मे तूफ़ान पैदा कर डाला था। मन तो उसके तुरंत चोदने को कर रहा था पर क्या करता वहां तो पढ़ने गया था।
एडमीशन देते हुए वो भी मुझे आंखों ही आंखों में तौल रही थी। वो 27 साल की भरे बदन वाली मैडम थी। शादी-शुदा, उसकी दोनो बूब्स (चूचियां) आधा किलो की थी और उसके गद्देदार मोटे चूतड़ (गांड) उभार लिये संगमरमर की मूरत से तराशे हुए हिलते ऐसे लगते थे जैसे कह रहे हो- “आजा राजा इस गांड को बजा जा”
मैने एडमीशन लेकर पूछा “कितने बजे आना है मैडम?” वोह मुस्करा कर बोली “सुबह 7 बजे आना।” “साथ क्या लाना है?” “वो बोली एक कोपी बस”। मैं घर वापस आ गया पर सारी रात सुबह होने के इंतज़ार में सो न सका। रात भर मैडम की हसीन मुस्कान और चेहरा सामने था। मैं बार-बार उनके ब्लाउज़ में कैद उन दो कबूतरों का ध्यान कर रहा था जो बाहर आने को बेताब थे। उनकी चूत कैसी होगी? गुलाबी चूत पे काला सिंघाड़ा होगा, उनकी चूत का लहसुन मोटा होगा या पतला, मुलायम मीठा या नमकीन, कितना नशा होगा उनके चूत के रस में? उनकी बुर की फांके गुलाब की पत्तियों सी फैला दूं तो क्या हो? ये कल्पना और मदहोश कर रही थी जिससे मेरे लंड फूल कर लम्बा और मोटा हो गया था और मेरी चड्ढी में उसने गीला पानी छोड़ दिया।
अगले दिन सुबह, जल्दी से नहा कर मैं इंगलिश की कोचिंग में टाइम से पहुंच गया। उस क्लास में और भी कुछ हसीन लड़कियां थीं। कुछ खूबसूरत शादी-शुदा औरतें भी थी जो हाई क्लास सोसाइटी में अपनी धाक जमाने के लिये इंगलिश सीखना चाह रही थीं ताकि हाई क्लास की रंगीनियों का मज़ा उठाया जा सके। मैं पीछे की सीट पर बैठ गया। थोड़ी देर में मैडम वहां आयी और गूड मोर्निंग के साथ मुझ पर नज़र पड़ते ही बोली –“तुम आगे आकर बैठो”। उनके कहने पर मैं आगे की सीट पर बैठ गया। वो सबको अपना परिचय हुए बोली – Hi, I am Nisha। अब आप लोग अपना परिचय दीजिये। हम सबने अपना-अपना परिचय दिया। फिर वो ब्लैक बोर्ड की तरफ़ मुड़कर लिखने लगी। जैसे ही वो मुड़ी उनकी गांड मेरे सामने थी और मन फिर उनकी गांड मारने के ख्याल में खो गया। क्या करुं जवानी 18 साल की कहां शांत रहती।
वो बहुत सुंदर लाइट कलर की साड़ी पहने थी। लाइट पिंक ब्लाउज़ के नीचे उनका काला ब्रा साफ़ दिख रहा था। साड़ी के पल्लु से उनकी चूची का बोर्डर ज़बान पे पानी ला रहा था। लालच मन में जगा रहा था। दोनो चुचियों के बीच की गहरी लाइन ब्रा के ऊपर से लंड को मस्ती दिला रही थी। वो मुड़ कर वापस क्लास को बोलने लगी ग्रामर के बारे में और मेरे एकदम पास चली आयी। मैं बैठा था और वो मेरे इतने करीब खड़ी थी कि उनका खुला पेट वाला हिस्सा मेरे मुंह के पास आ चुका था जिसमे से उनकी गोल-गोल गहरी टोंडी (नाभि) की महक मेरे नथुनो मे मीठा ज़हर घोल रही थी। फिर उनका पेन हाथ से गिरकर मेरे सामने टपक गया जिसे लेने वो नीचे झुकी तो दोनो चुचियां मेरे मुंह के सामने परस गये। उस दिन क्लास ऐसे ही चलता रहा। फिर जब क्लास खत्म हुआ तो जब सब चलने लगे तो मैडम ने मुझे रुकने को कहा। मैं अपनी कुरसी पर बैठा रहा। सबके चले जाने के बाद मैडम मेरे पास आयी और बोली-“ हेंडसम लग रहे हो” मैने कहा “थैंक यू”। तुम अभी क्या करते हो? मैं बोला- अभी 12th का exam दिया है अब मैं फ़्री हूं। मैडम बोली –मतलब अब तुम बालिग (एडल्ट) हो गये हो।” “यस मैडम”, मैं बोला।
“हूऊऊऊउम……। वो कुछ सोच कर बोली, तुम्हारा केला तो काफ़ी काफ़ी बड़ा है। ‘केला???’ मैं समझ तो गया था कि मैडम मेरे लंड की तरफ़ इशारा कर रही हैं पर मैं अंजान बना रहा। मैने पूछा किस केले की बात कर रही हैं आप? “अरे अब इतने अंजान मत बनो मेरे राजा, तुम्हारा लौड़ा जो काफ़ी बड़ा है और जो इस पैंट के नीचे से फूल कर बाहर हवा खाने को बेताब है। शायद इसने अभी तक गुझिया (चूत) का स्वाद नहीं चखा। असल में मैं क्लास जल्दी पहुंचने के चक्कर में नहा कर पैंट के नीचे अंडरवेअर पहनना भूल गया था जिससे मोटा लौड़ा तन कर पैंट में अपनी छाप दिखा रहा था।
मैडम को फ़्री और फ़्रेंक होता देख कर मैने भी कह दिया “हां मैडम अभी तक किसी की चूत का स्वाद नहीं चखा है।” वो बोली शनिवार की सुबह 6 बजे मेरे घर आ सकते हो, मैं अकेली रहती हूं। दर असल मेरे पति नेवी में हैं और हमारे कोई औलाद नहीं हैं। तुम आजाओगे तो मुझे कम्पनी हो जायेगी। मैने फ़ौरन हामी भर दी। मैं जानता तो था कि मैडम को मेरी कम्पनी क्यों चाहिये थी। उनको अपनी बुर की खुजली मिटानी थी और फिर जब पति नेवी में गांड मराये तो पत्नी दिन भर जब टीचिंग से लौट कर आये तो चूत चोदने को कोई लौड़ा तो चाहिये ही। इसमे कुछ गलत नहीं हैं। हर औरत की, हर लौंडिया की चूत में गरमी चढ़ती है और उसकी चूत की आग सिर्फ़ और सिर्फ़ लंड ही शांत कर सकता है।
सारी रात मैडम का ध्यान कर मैं सो न सका। सुबह घड़ी में अलार्म लगा दिया 5 बजे का। मम्मी भी सुबह अलार्म की आवाज़ से उठ गयी और बोली इतने सुबह कहां जा रहे हो?? मैने कहा सुबह रोज़ अब मैं जल्दी उठ कर जोगिंग करने जाउंगा और फिर वहीं से क्लास अटेंड कर वापस आउंगा। अब उनसे क्या कहता कि मैडम की चूत की खुजली शांत करने जा रहा हूं। सुबह चाय पीकर मैं तुरंत टैक्सी कर मैडम के पते पर कोपी लिये पहुंच गया। डोरबेल की घंटी बजायी तो थोड़ी देर बाद मैडम ब्लैक नाइटी पहने मुस्करा कर दरवाजा खोलती नज़र आयी। उनके नाइटी के दो बटन ऊपर के खुले थे और ब्रा नहीं पहने होने के कारण दोनो चूचियां मुझे साफ़ दिख रहीं थीं। नीचे पेटीकोट भी नहीं था क्योंकि उन्होने मेरा हाथ कमर पे रख मुझे अंदर बुलाया जिससे उनका बदन मेरे हाथ में आ गया था।
सामने खुला हुआ सीना मेरे दिल की धड़कन बढ़ा रहा था। वो मुसकरा कर बोली अब ऐसे ही खड़े-खड़े मेरी सूरत देखते रहोगे या मुझे अपनी बाहों में उठा कर बिस्तर पे भी ले चलोगे। मेरी जवानी कबसे मोटे लंड की आग में जल रही है, मेरी जवानी के मज़े नहीं लूटोगे??? मैने तुरंत कोपी पास पड़ी टेबल पर फेंक दी और मैडम को झट से अपनी बाहों में उठा लिया। उनके खुले बाल मेरे हाथ पर थे और उन्होने मेरे होंठों को अपने लिप्स में कैद कर लिया। उनका बेडरूम सामने ही था। मौसम थोड़ा गरम था इसलिये मैं उनको पहले बाथरूम में ले आया जहां उनको थोड़ा नहला कर मालिश कर गरम कर सकुं।
मैने मैडम को बाथरूम में खड़ा कर दिया और फिर उनकी काली नाइटी के ऊपर से पूरा मांसल बदन दबाया फिर सहलाया। उनके हाथ ऊपर कर उनकी काली नाइटी धीरे से उतार दी। अब वो पूरी नंगी मेरे सामने खड़ी थी। दूधिया बदन गोरी-गोरी-मोटी चूचियां और हल्के काले घुंघराले बालों के बीच गुलाबी मुलायम चूत। मैने शोवर चालु कर दिया पानी ऊपर से नीचे हर अंग को भिगो रहा था। मैने उनको चूमना चाटना शुरु कर दिया। होंठों से होंठ फिर गाल सब पर ज़बान फेर कर मज़ा देता गया। दोनो चूचियां बार बार दबा कर निप्पलों को मुंह में भर लिया। उनके पिंक निप्पल मोटे और बहुत सोफ़्ट थे। ज़बान निकाल कर गोल-गोल निप्पल पर घुमा कर चाट कर पिया। वो आअह्हह्हह…।।उह्हह्हह…ईईस्सस्सस…मज़ा आ गया बोली। और पियो ये निप्पल कब से तरस रहे थे कि कोई इनको पिये। मैने कस कर चूची मर्दन किया दबा दबा कर निप्पलों उकेर कर दोनो निप्पलों पर जबान से खूब खुजली की। मैडम भी अपनी ज़बान निकाल कर मेरे ज़बान के साथ अपने निप्पलों चाट रहीं थी। उनकी चूचियां फूल कर बड़ी हो गयी थी और मैं नीचे उनके नाभि पर आ गया था। गोल नाभि की गहरायी नापने में 2 मिनट लगा इससे पहले चूचियों का मसाज और निप्पलों को चूस कर 10 मिनट तक उनको प्यार के नशे में डुबाता चला गया। इस क्रिया से मेरा लौड़ा भी नागराज की तरह फुंकारता हुआ खड़ा हो कर 7 इंच का हो चुका था जिस पर मैडम का हाथ पहुंच गया था। मैने धीरे से मैडम को बाथरूम के फ़र्श पर लिटाया ताकि उनकी चूत खुल कर मेरे सामने आ सके और मैं उनकी गुलाबी गुझिया में उंगली डाल सकुं।
मैं धीरे से उनकी चूत का रस पीने के इरादे से नीचे गया। उनकी झांटों पर पड़ी पानी की बूंदों ने मुझे उनके झांटों पर चांदी की तरह चमकती बूंदों को पीने की चाह जगा दी। मैं उनकी काली, मुलायम घुंघराली झांटों को अपने होंठों में कैद कर अपने लिप्स से पीने लगा। उनकी जब झांटें खिंचती तो वो अह्हह्हह्हह्हह्हह्हह्ह……।।ऊऊऊऊऊह्हह्हह
…।।ह्हहाईईइ………।ज्जज्जजाआअन्नन्नन्नन्नन्न…।।स्सस्सस्सस्सस्सस्सस्सस… करती जिससे मेरा लंड और कड़क हो जाता। उनकी झांटों से पानी साफ़ करने के बाद मैने दोनो उंगलियों से उनकी चूत की गहरायी को नापा मतलब दोनो उंगलियां अंदर गुलाबी छेद में डाल दी गहरायी तक। फिर ज़बान पास लाकर उनके चूत का सिंघाड़ा अपने मुंह में कैद कर लिया। करीब 10 मिनट तक उनकी नशीली चूत का रस अपनी ज़बान से पीता रहा और उनकी गरम चूत में अपनी ज़बान चलाता रहा। ऊपर से नीचे फिर नीचे से ऊपर और फिर ज़बान को कड़ा कर अंदर बाहर भी। ज़बान से चूत रस चाटते वक्त मैने एक उंगली नीचे खूबसुरत से दिख रहे गांड के छेद पे लगा दी। उनको तैयार कर मैने अपना अंडरवेअर उतारा जिससे मैडम बाथरूम के फ़र्श पर उठ कर मेरे ऊपर मेरी तरफ़ गांड कर 69 की पोजीशन में लेट गयी और मेरा लंड अपने मुंह में डाल लिया।
मैं मैडम की चूत मैं नीचे से पीछे से ज़बान डाल कर उनका रस चाटे जा रहा था और मैडम को मेरा गुलाबी सुपाड़ा बहुत मज़ा दे रहा था। वो बच्चो की तरह उसे चूसे जा रहीं थी। क्योंकि उनको लंड बहुत दिनो बाद नसीब हुआ था। मेरा तना लंड उनको बहुत मज़ा दे रहा था वो 5 मिनट तक मेरा लौड़ा अपने होंठों में कैद कर चूसती रहीं ज़बान से लंड के सुपाड़े को चाट-चाट कर लाल कर दिया था और लंड तन कर रोड की तरह पूरा कड़ा हो गया था पर मैडम छोड़ ही नहीं रहीं थी। मैने बोला मैडम मैं झड़ने वाला हूं तो उन्होने मुझे खड़ा कर दिया और खुद भी मेरे ऊपर से हट गयी। बोली-आओ राजा मेरी ज़बान पर गिरा दो। वो मेरे लंड के पास मुंह खोल कर ज़बान निकाल कर बैठ गयीं। मैने अपने हाथ से हिला कर जल्दी से अपना सारा गरम गरम शहद उनकी ज़बान पे गिराया जिसे उन्होने अपनी आंखे बंद कर जन्नत का मज़ा लिया। वो मेरे गरम वीर्य की आखिरी बूंद तक चाट गयी। फिर उन्होने अपना मुंह धोया और मुझे बोली अब मुझको बेडरूम में ले चलो राजा। मैं भी उनकी चूत चोदने को बेताब था।
मैने उनको उठा लिया और बेड पर चित लिटा दिया। उनकी दोनो गोरी टांगो को खूब फैला दिया ताकि उनकी गुलाबी चूत मेरे सामने खुल जाये और मुझे उनकी चूत को चाटने में ज़रा भी कठिनाई न हो। वो फिर से मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर आगे पीछे हिलाने लगी। उनके ये करने से मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। मैने उनकी नशीली चूत को चाट कर अपने थूक से चिकना किया। वैसे उनकी चूत बहुत मक्खन सी मुलायम और मलमल सी चिकनी थी। वो गरम-गरम मलाई से भरपूर चूत मुझे अब जन्नत सी लग रही थी जिसको अब चोदना बहुत ज़रूरी हो गया था। मेरे लप-लप कर उनकी चूत को चाटने से वो अपने मुंह से सी…सी…ऊऊऊओ…।अह्हह्हह्हह्हह्ह कर रही थी। बोली मेरे राजा जल्दी से अपना 7 इंच का शेर मेरी प्यार की गुफ़ा में घुसा दो। जल्दी से इस चूत की खुजली शांत करो। बहुत तड़प रहीं हूं। मैने जल्दी से उनकी गोरी मांसल जांघो को दूर दूर किया और लौड़ा पकड़ कर अपना सुपाड़ा चूत के मुंह पे टिका कर सहलाया। फिर एक धीरे से ज़ोर लगाया जिससे लंड खच की आवाज़ से अंदर गरम गरम चूत में अंदर तक समा गया। वो आंखें बंद कर मस्त होने लगी। मैं बोला निशा तुम बहुत मस्त हो। वो मुस्कुरा दी। मैने अपने लंड का वेग बढ़ा दिया। लंड जल्दी जल्दी अंदर बाहर चलने लगा। लंड पूरे ज़ोर से अंदर बाहर आ जा रहा था जिससे निशा की चूचियां भी हिल रही थीं। दोनो बूब्स को मैने हाथ में भर कर मसलना शुरु कर दिया था और उनके निप्पल भी अपने होंठों में चूसने लगा। निशा की जवानी लूट कर 10 मिनट तक गरम लंड रोड सा उसकी बुर को फाड़ता रहा। फिर मैने उसकी चूत से लंड बाहर निकाला और अपना गरम वीर्य उसकी चूत के ऊपर और टोंढी के छेद में डाल दिया।
अब वो शांत हो चुकी थीं और मेरा पहला प्यार का क्लास 1 घंटे में खतम हुआ था। सेक्स की इस क्लास में मुझको मज़ा मिला था। अनोखा मज़ा। आपको मेरी पहली क्लास कैसी लगी, प्लीज ई-मेल कर मुझे ज़रूर बताना। और जो मुझसे चुदवाना चाहतीं हों वो सभी मैडम, भाभियां, औरतें, लड़कियां मुझे थोड़े से पैसे देकर पूरा मज़ा ले। Secracy assured और सेफ़ सेक्स हाईजीनिक भी। तो मज़ा लेने के लिये जवानी का तुरंत मेल करें:
कमला की चुदाई
कमला की चुदाई
अमर बहुत दिनों से अपनी छोटी बहन कमला को भोगने की ताक में था. अमर एक जवान हट्टा कट्टा युवक था और अपनी पत्नी रेखा और बहन कमला के साथ रहता था. कमला पढ़ाई के लिये शहर आई हुई थी और अपने भैया और भाभी के साथ ही रहती थी.
वह एक कमसिन सुंदर किशोरी थी. जवानी में कदम रखती वह बाला दिखने में साधारण सुंदर तो थी ही पर लड़कपन ने उसके सौम्दर्य को निखार दिया था. उसके उरोज उभरना शुरू हो गये थे और उसके टाप या कुर्ते में से उनका उभार साफ़ दिखता था. उसकी स्कूल की ड्रेस की स्कर्ट के नीचे दिखतीं गोरी गोरी चिकनी टांगें अमर को दीवाना बना देती थी. कमला थी भी बड़ी शोख और चंचल. उसकी हर अदा पर अमर मर मिटता था.
अमर जानता था कि अपनी ही छोटी कुंवारी बहन को भोगने की इच्छा करना ठीक नहीं है पर विवश था. कमला के मादक लड़कपन ने उसे दीवाना बना दिया था. वह उसकी कच्ची जवानी का रस लेने को कब से बेताब था पर ठीक मौका न मिलने से परेशान था. उसे लगने लगा था कि वह अपने आप पर ज्यादा दिन काबू नही रख पायेगा. चाहे जोर जबरदस्ती करनी पड़े, पर कमला को चोदने का वह निश्चय कर चुका था.
एक बात और थी. अह अपनी बीवी रेखा से छुपा कर यह काम करना चाहता था क्योंकि वह रेखा का पूरा दीवाना था और उससे दबता था. रेखा जैसी हरामी और चुदैल युवती उसने कभी नहीं देखी थी. बेडरूम में अपने रम्डियों जैसे अम्दाज से शादी के तीन माह के अन्दर ही उसने अपने पति को अपनी चूत और गांड का दीवाना बना लिया था. अमर को डर था कि रेखा को यह बात पता चल गयी तो न जाने वह गुस्से में क्या कर बैठे.
असल में उसका यह डर व्यर्थ था क्योंकि रेखा अपने पति की मनोकामना खूब अच्छे से पहचानती थी. कमला को घूरते हुए अमर के चेहरे पर झलकती प्रखर वासना उसने कब की पहचान ली थी. सच तो यह था कि वह खुद इतनी कामुक थी कि अमर हर रात चोद कर भी उसकी वासना ठीक से तृप्त नहीं कर पाता था. दोपहर को वह बेचैन हो जाती थी और हस्तमैथुन से अपनी आग शांत करती थी. उसने अपने स्कूल के दिनों में अपनी कुछ खास सह्लियों के साथ सम्बम्ध बना लिये थे और उसे इन लेस्बियन रतिक्रीड़ाओं में बड़ा मजा आता था. अपनी मां की उमर की स्कूल पिम्चिपल के साथ तो उसके बहुत गहरे काम सम्बम्ध हो गये थे.
शादी के बाद वह और किसी पुरुष से सम्बम्ध नहीं रखना चाहती थी क्योंकि अमर की जवानी और मजबूत लंड उसके पुरुष सुख के लिये पर्याप्त था. वह भूखी थी तो स्त्री समबम्ध की. वैसे तो उसे अपनी सास याने अमर की मां भी बहुत अच्छी लगी थी. वह उसके स्कूल प्रिम्चिपल जैसी ही दिखती थी. पर सास के साथ कुछ करने की इच्छा उसके मन में ही दबी रह गई. मौका भी नहीं मिला क्योंकि अमर शहर में रहता था और मां गाम्व मेम.
अब उसकी इच्छा यही थी कि कोई उसके जैसी चुदैल नारी, छोटी या बड़ी, समलिग सम्भोग के लिये मिल जाये तो मजा आ जाये. पिछले दो माह में वह कमला की कच्ची जवानी की ओर बहुत आकर्षित होने लगी थी. कमला उसे अपने बचपन की प्यारी सहेली अम्जू की याद दिलाती थी. अब रेखा मौका ढूंढ रही थी कि कैसे कमला को अपने चम्गुल में फ़म्साया जाये. अमर के दिल का हाल पहचानने पर उसका यह काम थोड़ा आसान हो गया.
एक दिन उसने जब अमर को स्कूल के ड्रेस को ठीक करती कमला को वासना भरी नजरों से घूरते देखा तो कमला के स्कूल जाने के बाद अमर को तना मारते हुए बोल पड़ी "क्योम्जी, मुझसे मन भर गया क्या जो अब इस कच्ची कली को घूरते रहते हो. और वह भी अपनी सगी छोटी कमसिन बहन को?" अमर के चेहरे पर हवाइय्मा उड़ने लगीं कि वह आखिर पकड़ा गया. कुछ न बोल पाया. उसे एक दो कड़वे ताने और मारकर फ़िर रेखा से न रहा गया और अपने पति का चुम्बन लेते हुए वह खिलखिलाकर हम्स पड़ी. जब उसने अमर से कहा कि वह भी इस गुड़िया की दीवानी है तो अमर खुशी से उछल पड़ा.
रेखा ने अमर से कहा कि दोपहर को अपनी वासना शांत करने में उसे बड़ी तकलीफ़ होती है. "तुम तो काम पर चले जाते हो और इधर मैम मुठ्ठ मार मार कर परेशान हो जाती हूं. इस बुर की आग शांत ही नहीं होती. तुम ही बताओ मैम क्या करूम." और उसने अपने बचपन की सारी लेस्बियन कथा अमर को बता दी.
अमर उसे चूंअते हुए बोला. "पर रानी, दो बार हर रात तुझे चोदता हूं, तेरी गांड भी मारता हूं, बुर चूसता हूं, और मैम क्या करूम." रेखा उसे दिलासा देते हुए बोली. "तुम तो लाखों में एक जवान हो मेरे राजा. इतना मस्त लंड तो भाग्य से मिलता है. पर मैम ही ज्यादा गरम हूं, हर समय रति करना चाहती हूं. लगता है किसी से चुसवाऊं. तुम रात को खूब चूसते हो और मुझे बहुत मजा आता है. पर किसी स्त्री से चुसवाने की बात ही और है. और मुझे भी किसी की प्यारी रसीली बुर चाटने का मन होता है. कमला पर मेरी नजर बहुत दिनों से है. क्या रसीली छोकरी है, दोपहर को मेरी यह नन्ही ननद मेरी बाहों में आ जाये तो मेरे भाग खुल जायें."
रेखा ने अमर से कहा को वह कमला पर चढ़ने में अमर की सहायता करेगी पर इसी शर्त पर कि फ़िर दोपहर को वह कमला के साथ जो चाहे करेगी और अमर कुछ नहीं कहेगा. रोज वह खुद दिन में कमला को जैसे चाहे भोगेगी और रात में दोनो पति - पत्नी मिलकर उस बच्ची के कमसिन शरीर का मन चाहा आनम्द लेंगे.
अमर तुरम्त मान गया. रेखा और कमला के आपस में सम्भोग की कल्पना से ही उसका खड़ा होने लगा. दोनों सोचने लगे कि कैसे कमला को चोदा जाये. अमर ने कहा कि धीरे धीरे प्यार से उसे फ़ुसलाया जाय. रेखा ने कहा कि उसमें यह खतरा है कि अगर नहीं मानी तो अपनी मां से सारा भाम्डा फ़ोड़ देगी. एक बार कमला चुद जाने के बाद फ़िर कुछ नहीं कर पायेगी. चाहे यह जबरदस्ती करना पड़े
रेखा ने उसे कहा कि कल वह कमला को स्कूल नहीं जाने देगी. आफिस जाने के पहले वह कमला को किसी बहाने से अमर के कमरे में भेज देगी और खुद दो घम्टे को काम का बहाना करके घर के बाहर चली जायेगी. कमला बेदरूम में चुदाई के चित्रों की किताब देख कर उसे जरूर पढ़ेगी. अमर उसे पकड़ कर उसे डाम्टने के बहाने से उसे दबोच लेगा और फिर दे घचाघच चोद मारेगा. मन भर उस सुंदर लड़की को ठोकने के बाद वह आफिस निकल जायेगा और फ़िर रेखा आ कर रोती बिलखती कमला को संहालने के बहाने खुद उसे दोपहर भर भोग लेगी.
रात को तो मानों चुदाई का स्वर्ग उमड़ पड़ेगा. उसके बाद तो दिन रात उस किशोरी की चुदाई होती रहेगी. सिर्फ़ सुबह स्कूल जाने के समय उसे आराम दिया जायेगा. बाकी समय दिन भर कामक्रीड़ा होगी. उसने यह भी कहा कि शुरू में भले कमला रोये धोये, जल्द ही उसे भी अपने सुंदर भैया भाभी के साथ मजा आने लगेगा और फ़िर वह खुद हर समय चुदवाने को तैयार रहेगी. अमर को भी यह प्लान पसमद आया. रात बड़ी मुश्किल से निकली क्योंकि रेखा ने उसे उस रात चोदने नहीं दिया, उसके लंड का जोर तेज करने को जान बूझ कर उसे प्यासा रखा. कमला को देख देख कर अमर यही सोच रहा था कि कल जब यह बच्ची बाहों में होगी तब वह क्या करेगा.
सुबह अमर ने नहाधोकर आफिस में फोन करके बताया कि वह लेट आयेगा. उधर रेखा ने कमला को नीम्द से ही नहीं उठाया और उसके स्कूल का टाइम मिस होने जाने पर उसे कहा कि आज गोल मार दे. कमला खुशी खुशी मान गयी. अमर ने एक अश्लील किताब अपने बेडरूम में तकिये के नीचे रख दी. फ़िर बाहर जा कर पेपर पढ़ने लगा. रेखा ने कमला से कहा कि अम्दर जाकर बेडरूम जरा जमा दे क्योंकि वह खुद बाहर जा रही है और दोपहर तक वापस आयेगी.
जब कमला अन्दर चली गई तो रेखा ने अमर से कहा. "डार्लिम्ग, जाओ, मजा करो. रोये चिलाये तो परवाह नहीं करना, मैम दरवाजा लगा दूम्गी. पर अपनी बहन को अभी सिर्फ़ चोदना. गांड मत मारना. उसकी गांड बड़ी कोमल और सकरी होगी. इसलिये लंड गांड में घुसते समय वह बहुत रोएगी और चीखेगी. मैम भी उसकी गांड चुदने का मजा लेने के लिये और उसे संहालने के लिये वहां रहना चाहती हूम. इसलिये उसकी गांड हम दोनों मिलकर रात को मारेम्गे."
अमर को आम्ख मार कर वह दरवाजा बन्द करके चली गयी. पाम्च मिनिट बाद अमर ने चुपचाप जा कर देखा तो प्लान के अनुसार कमला को तकिये के नीचे वह किताब मिलने पर उसे पढ़ने का लोभ वह नहीं सहन कर पाई थी और बिस्तर पर बैठ कर किताब देख रही थी. उन नग्न सम्भोग चित्रों को देख देख कर वह किशोरी अपनी गोरी गोरी टांगें आपस में रगड़ रही थी. उसका चेहरा कामवासना से गुलाबी हो गया था.
मौका देख कर अमर बेडरूम में घुस गौर बोला. "देखूम, मेरी प्यारी बहना क्या पढ़ रही है?" कमला सकपका गयी और किताब छुपाने लगी. अमर ने छीन कर देखा तो फोटो में एक औरत को तीन तीन जवान पुरुष चूत, गांड और मुंह में चोदते दिखे. अमर ने कमला को एक तमाचा रसीद किया और चिल्लाया "तो तू आज कल ऐसी किताबें पढ़ती है बेशर्म लड़की. तू भी ऐसे ही मरवाना चाहती है? तेरी हिम्मत कैसे हुई यह किताब देखने की? देख आज तेरा क्या हाल करता हूम."
कमला रोने लगी और बोली कि उसने पहली बार किताब देखी है और वह भी इसलिये कि उसे वह तकिये के नीचे पड़ी मिली थी. अमर एक न माना और जाकर दरवाजा बन्द कर के कमला की ओर बढ़ा. उसकी आम्खों में कामवासना की झलक देख कर कमला घबरा कर कमरे में रोती हुई इधर उधर भागने लगी पर अमर ने उसे एक मिनट में धर दबोचा और उसके कपड़े उतारना चालू कर दिये. पहले स्कर्ट खीम्च कर उतार दी और फिर ब्लाउज. फाड़ कर निकाल दिया. अब लड़की के चिकने गोरे शरीर पर सिर्फ़ एक छोटी सफ़ेद ब्रा और एक पैन्टी बची. वह अभी अभी दो माह पहले ही ब्रेसियर पहनने लगी थी.
उसके अर्धनग्न कोमल कमसिन शरीर को देखकर अमर का लंड अब बुरी तरह तन्ना कर खड़ा हो गया था. उसने अपने कपड़े भी उतार दिये और नंगा हो गया. उसके मस्त मोटे ताजे कस कर खड़े लंड को देख कर कमला के चेहरे पर दो भाव उमड़ पड़े. एक घबराहट का और एक वासना का. वह भी सहेलियों के साथ ऐसी किताबें अक्सर देखती थी. उनमें दिखते मस्त लम्डों को याद करके रात को हस्तमैथुन भी करती थी. कुछ दिनों से बार बार उसके दिमाग में आता था कि उसके हैम्डसम भैया का कैसा होगा. आज सच में उस मस्ताने लौड़े को देखकर उसे दर के साथ एक अजीब सिहरन भी हुई.
"चल मेरी नटखट बहना, नंगी हो जा, अपनी सजा भुगतने को आ जा" कहते हुए अमर ने जबरदस्ती उसके अम्तर्वस्त्र भी उतार दिये. कमला छूटने को हाथ पैर मारती रह गई पर अमर की शक्ति के सामने उसकी एक न चली. वह अब पूरी नंगी थी. उसका गोरा गेहुमा चिकना कमसिन शरीर अपनी पूरी सुम्दरता के साथ अमर के सामने था. कमला को बाहों में भर कर अमरने अपनी ओर खीम्चा और अपने दोनो हाथों में कमला के मुलायम जरा जरा से स्तन पकड़ कर सहलाने लगा. चाहता तो नहीं था पर उससे न रहा गया और उन्हें जोर से दबाने लगा. वह दर्द से कराह उठी और रोते हुए बोली "भैया, दर्द होता है, इतनी बेरहमी से मत मसलो मेरी चूचियों को".
अमर तो वासना से पागल था. कमला का रोना उसे और उत्तेजित करने लगा. उसने अपना मुंह खोल कर कमला के कोमल रसीले होंठ अपने होंठों में दबा लिये और उन्हें चूसते हुए अपनी बहन के मीठे मुख रस का पान करने लगा. साथ ही वह उसे धकेलता हुआ पलंग तक ले गया और उसे पटक कर उसपर चढ़ बैठा. झुक कर उसने कमला के गोरे स्तन के काले चूचुक को मुंह में ले लिया और चूसने लगा. उसके दोनों हाथ लगातार अपनी बहन के बदन पर घूंअ रहे थे. उसका हर अम्ग उसने खूब टटोला.
मन भर कर मुलायम मीठी चूचियां पीने के बाद वह बोला. "बोल कमला रानी, पहले चुदवाएगी, या सीधे गांड मरवाएगी?" आठ इम्च का तन्नाया हुआ मोटी ककड़ी जैसा लम्ड उछलता हुआ देख कर कमला घबरा गयी और बिलखते हुए उससे याचना करने लगी. "भैया, यह लंड मेरी नाजुक चूत फ़ाड़ डालेगा, मैम मर जाऊम्गी, मत चोदो मुझे प्ली ऽ ज़ . मैम आपकी मुठ्ठ मार देती हूं"
अमर को अपनी नाज़ुक किशोरी बहन पर आखिर तरस आ गया. इतना अब पक्का था कि कमला छूट कर भागने की कोशिश अब नहीं कर रही थी और शायद चुदने को मन ही मन तैयार थी भले ही घबरा रही थी. उसे प्यार से चूमता हुआ अमर बोला. "इतनी मस्त कच्ची कली को तो मैम नहीं छोड़ने वाला. और वह भी मेरी प्यारी नन्ही बहन! चोदूम्गा भी और गांड भी मारूम्गा. पर चल, पहले तेरी प्यारी रसीली चूत को चूस लूम मन भर कर, कब से इस रस को पीने को मैम मरा जा
कमला की गोरी गोरी चिकनी जाम्घें अपने हाथों से अमर ने फ़ैला दीं और झुक कर अपना मुंह बच्ची की लाल लाल कोमल गुलाब की कली सी चूत पर जमा कर चूसने लगा. अपनी जीभ से वह उस मस्त बुर की लकीर को चाटने लगा.
कमला की गोरी बचकानी चूत पर बस जरा से रेशम जैसे कोमल बाल थे. बाकी वह एकदम साफ़ थी. उसकी बुर को उंगलियों से फ़ैला कर बीच की लाल लाल म्यान को अमर चाटने लगा. चाटने के साथ अमर उसकी चिकनी माम्सल बुर का चुंबन लेता जाता. धीरे धीरे कमला का सिसकना बम्द हो गया. उसकी बुर पसीजने लगी और एक अत्यम्त सुख भरी मादक लहर उसके जवान तन में दौड़ गयी. उसने अपने भाई का सिर पकड़ कर अपनी चूत पर दबा लिया और एक मद भरा सीत्कार छोड़कर वह चहक उठी. "चूसो भैया, मेरी चूत और जोर से चूसो. जीभ डाल दो मेरी बुर के अन्दर."
अमर ने देखा कि उसकी छोटी बहन की जवान बुर से मादक सुगन्ध वाला चिपचिपा पानी बह रहा है जैसे कि अमृत का झरना हो. उस शहद को वह प्यार से चाटने लगा. उसकी जीभ जब कमला के कड़े लाल मणि जैसे क्लिटोरिस पर से गुजरती तो कमला मस्ती से हुमक कर अपनी जाम्घें अपने भाई के सिर के दोनों ओर जकड़ कर धक्के मारने लगती. कुछ ही देर में कमला एक मीठी चीख के साथ झड़ गई. उसकी बुर से शहद की मानों नदी बह उठी जिसे अमर बड़ी बेताबी से चाटने लगा. उसे कमला की बुर का पानी इतना अच्छा लगा कि अपनी छोटी बहन को झड़ाने के बाद भी वह उसकी चूत चाटता रहा और जल्दी ही कमला फ़िर से मस्त हो गयी.
कामवासना से सिसकते हुए वह फ़िर अपने बड़े भाई के मुंह को चोदने लगी. उसे इतना मजा आ रहा था जैसा कभी हस्तमैथुन में भी नहीं आया था. अमर अपनी जीभ उसकी गीली प्यारी चूत में डालकर चोदने लगा और कुछ ही मिनटों में कमला दूसरी बार झड़ गयी. अमर उस अंऋत को भूखे की तरह चाटता रहा. पूरा झड़ने के बाड एक तृप्ति की साम्स लेकर वह कमसिन बच्ची सिमटकर अमर से अलग हो गयी क्योंकि अब मस्ती उतरने के बाद उसे अपनी झड़ी हुई बुर पर अमर की जीभ का स्पर्श सहन नहीं हो रहा था.
अमर अब कमला को चोदने के लिये बेताब था. वह उठा और रसोईसे मक्खन का डिब्बा ले आया. थोड़ा सा मक्खन उसने अपने सुपाड़े पर लगया और कमला को सीधा करते हुए बोला. "चल छोटी, चुदाने का समय आ गया." कमला घबरा कर उठ बैठी. उसे लगा था कि अब शायद भैया छोड़ देम्गे पर अमर को अपने बुरी तरह सूजे हुए लंड पर मख्खन लगाते देख उसका दिल डर से धड़कने लगा. वह पलंग से उतर कर भागने की कोशिश कर रही थी तभी अमर ने उसे दबोच कर पलंग पर पटक दिया और उस पर चढ़ बैठा. उसने उस गिड़गिड़ाती रोती किशोरी की एक न सुनी और उस की टांगें फ.ऐला कर उन के बीच बैठ गया. थोड़ा मक्खन कमला की कोमल चूत में भी चुपड़ा. फिर अपना टमाटर जैसा सुपाड़ा उसने अपनी बहन की कोरी चूत पर रखा और अपने लंड को एक हाथ से थाम लिया.
अमर को पता था कि चूत में इतना मोटा लंड जाने पर कमला दर्द से जोर से चिल्लाएगी. इसलिये उसने अपने दूसरे हाथ से उसका मुंह बम्द कर दिया. वासना से थरथराते हुए फिर वह अपना लंड अपनी बहन की चूत में पेलने लगा. सकरी कुम्वारी चूत धीरे धीरे खुलने लगी और कमला ने अपने दबे मुंह में से दर्द से रोना शुरु कर दिया. कमसिन छोकरी को चोदने में इतना आनन्द आ रहा था कि अमर से रहा ना गया और उसने कस कर एक धक्का लगाया. सुपाड़ा कोमल चूत में फच्च से घुस गया और कमला छटपटाने लगी.
अमर अपनी बहन की कपकपाती बुर का मजा लेते हुए उसकी आम्सू भरी आम्खों में झाम्कता उसके मुंह को दबोचा हुआ कुछ देर वैसे ही बैठा रहा. कमला के बम्द मुंह से निकलती यातना की दबी चीख सुनकर भी उसे बहुत मजा आ रहा था. उसे लग रहा था कि जैसे वह एक शेर है जो हिरन के बच्चे का शिकार कर रहा है.
कुछ देर बाद जब लंड बहुत मस्ती से उछलनए लगा तो एक धक्का उसने और लगाया. आधा लंड उस किशोरी की चूत में समा गया और कमला दर्द के मारे ऐसे उछली जैसे किसी ने लात मारी हो. चूत में होते असहनीय दर्द को वह बेचारी सह न सकी और बेहोश हो गयी. अमर ने उसकी कोई परवाह नहीं की और धक्के मार मार कर अपना मूसल जैसा लंड उस नाज.उक चूत में घुसेड़ना चालू रखा. अन्त में जड़ तक लवड़ा उस कुम्वारी बुर में उतारकर एक गहरी साम्स लेकर वह अपनी बहन के ऊपर लेट गया. कमला के कमसिन उरोज उसकी छाती से दबकर रह गये और छोटे छोटे कड़े चूचुक उसे गड़ कर मस्त करने लगे.
अमर एक स्वर्गिक आनन्द में डूबा हुआ था क्योंकि उसकी छोटी बहन की सकरी कोमल मखमल जैसी मुलायम बुर ने उसके लंड को ऐसे जकड़ा हुआ था जैसे कि किसीने अपने हाथों में उसे भीम्च कर पकड़ा हो. कमला के मुंह से अपना हाथ हटाकर उसके गुलाबी होंठों को चूमता हुआ अमर धीरे धीरे उसे बेहोशी में ही चोदने लगा. बुर में चलते उस सूजे हुए लंड के दर्द से कमला होश में आई. उसने दर्द से कराहते हुए अपनी आम्खें खोलीं और सिसक सिसक कर रोने लगी. "अमर भैया, मैम मर जाऊम्गी, उई माम, बहुत दर्द हो रहा है, मेरी चूत फटी जा रही है, मुझपर दया करो, आपके पैर पड़ती हूम."
अमर ने झुक कर देखा तो उसका मोटा ताजा लंड कमला की फैली हुई चूत से पिस्टन की तरह अन्दर बाहर हो रहा था. बुर का लाल छेद बुरी तरह खिम्चा हुआ था पर खून बिल्कुल नहीं निकला था. अमर ने चैन की साम्स ली कि बच्ची को कुछ नहीं हुआ है, सिर्फ़ दर्द से बिलबिला रही है. वह मस्त होकर अपनी बहन को और जोर से चोदने लगा. साथ ही उसने कमला के गालों पर बहते आम्सू अपने होंठों से समेटन शुरू कर दिया. कमला के चीखने की परवाह न करके वह जोर जोर से उस कोरी मस्त बुर में लंड पेलने लगा. "हाय क्या मस्त चिकनी और मखमल जैसी चूत है तेरी कमला, सालों पहले चोद डालना था तुझे. चल अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है, रोज तुझे देख कैसे तड़पा तड़पा कर चोदता हूं."
टाइट बुर में लंड चलने से 'फच फच फच' ऐसी मस्त आवाज होने लगी. जब कमला और जोर से रोने लगी तो अमर ने कमला के कोमल गुलाबी होंठ अपने मुंह मे दबा लिये और उन्हें चूसते हुए धक्के मारने लगा. जब आनन्द सहन न होने से वह झड़ने के करीब आ गया तो कमला को लगा कि शायद वह झड़ने वाला है इसलिये बेचारी बड़ी आशा से अपनी बुर को फ़ाड़ते लंड के सिकुड़ने का इम्तजार करने लगी. पर अमर अभी और मजा लेना चाहता था; पूरी इच्छाशक्ति लगा कर वह रुक गया जब तक उसका उछलता लंड थोड़ा शान्त न हो गया.
सम्हलने के बाद उसने कमला से कहा "मेरी प्यारी बहन, इतनी जल्दी थोड़े ही छोड़ूम्गा तुझे. मेहनत से लंड घुसाया है तेरी कुम्वारी चूत में तो माम-कसम, कम से कम घन्टे भर तो जरूर चोदूम्गा." और फ़िर चोदने के काम में लग गया.
दस मिनिट बाद कमला की चुदती बुर का दर्द भी थोड़ा कम हो गया था. वह भी आखिर एक मस्त यौन-प्यासी लड़की थी और अब चुदते चुदते उसे दर्द के साथ साथ थोड़ा मजा भी आने लगा था. अमर जैसे खूबसूरत जवान से चुदने में उसे मन ही मन एक अजीब खुशी हो रही थी, और ऊपर से अपने बड़े भाई से चुदना उसे ज्यादा उत्तेजित कर रहा था.
जब उसने चित्र में देखी हुई चुदती औरत को याद किया तो एक सनसनाहट उसके शरीर में दौड़ गयी. चूत में से पानी बहने लगा और मस्त हुई चूत चिकने चिपचिपे रस से गीली हो गयी. इससे लंड और आसानी से अन्दर बाहर होने लगा और चोदने की आवाज भी तेज होकर 'पकाक पकाक पकाक' निकलने लगी.
रोना बन्द कर के कमला ने अपनी बाम्हें अमर के गले में डाल दीं और अपनी छरहरी नाजुक टांगें खोलकर अमर के शरीर को उनमें जकड़ लिया. वह अमर को बेतहाशा चूंअने लगी और खुद भी अपने चूतड़ उछाल उछाल के चुदवाने लगी. "चोदिये मुझे भैया, जोर जोर से चोदिये. ःआय, बहुत मजा आ रहा है. मैने आपको रो रो कर बहुत तकलीफ़ दी, अब चोद चोद कर मेरी बुर फाड़ दीजिये, मैम इसी लायक हूम."
अमर हम्द पड़ा. "है आखिर मेरी ही बहन, मेरे जैसी चोदू. पर यह तो बता कमला, तेरी चूत में से खून नहीं निकला, लगता है बहुत मुठ्ठ मारती है, सच बोल, क्या डालती है? मोमबत्ती या ककड़ी?" कमला ने शरमाते हुए बताया कि गाजर से मुठ्ठ मारनी की उसे आदत है. इसलिये शायद बुर की झिल्ली कब की फ़ट चुकी थी.
भाई बहन अब हचक हचक कर एक दूसरे को चोदने लगे. अमर तो अपनी नन्ही नाजुक किशोरी बहन पर ऐसा चढ़ गया जैसे कि किसी चुदैल रन्डी पर चढ़ कर चोदा जाता है. कमला को मजा तो आ रहा था पर अमर के लंड के बार अम्दर बाहर होने से उसकी चूत में भयानक दर्द भी हो रहा था. अपने आनन्द के लिये वह किसी तरह दर्द सहन करती रही और मजा लेती हुई चुदती भी रही पर अमर के हर वार से उसकी सिसकी निकल आती.
काफ़ी देर यह सम्भोग चला. अमर पूरे ताव में था और मजे ले लेकर लंड को झड़ने से बचाता हुआ उस नन्ही जवानी को भोग रहा था. कमला कई बार झड़ी और आखिर लस्त हो कर निढाल पलंग पर पड़ गई. चुदासी उतरने पर अब वह फ़िर रोने लगी. जल्द ही दर्द से सिसक सिसक कर उसका बुरा हाल हो गया क्योंकि अमर का मोटा लंड अभी भी बुरी तरह से उसकी बुर को चौड़ा कर रहा था.
अमर तो अब पूरे जोश से कमलापर चढ़ कर उसे भोग रहा था जैसे वह इम्सान नहीम, कोई खिलौना हो. उसके कोमल गुप्ताम्ग को इतनी जोर की चुदाई सहन नहीं हुई और सात आठ जोरदार झटकों के बाद वह एक हल्की चीख के साथ कमला फिर बेहोश हो गयी. अमर उस पर चढ़ा रहा और उसे हचक हचक कर चोदता रहा. चुदाई और लम्बी खीम्चने की उसने भरसक कोशिश की पर आखिर उससे रहा नहीं गया और वह जोर से हुमकता हुआ झड़ गया.
गरम गरम गाढ़े वीर्य का फ़ुहारा जब कमला की बुर में छूटा तो वह होश में आयी और अपने भैया को झड़ता देख कर उसने रोना बम्द करके राहत की एक साम्स ली. उसे लगा कि अब अमर उसे छोड़ देगा पर अमर उसे बाहों में लेकर पड़ा रहा. कमला रोनी आवज में उससे बोली. "भैया, अब तो छोड़ दीजिये, मेरा पूरा शरीर दुख रहा है आप से चुद कर." अमर हम्सकर बेदर्दी से उसे डराता हुआ बोला. "अभी क्या हुआ है कमला रानी. अभी तो तेरी गांड भी मारनी है."
कमला के होश हवास यह सुनकर उड़ गये और घबरा कर वह फिर रोने लगी. अमर हम्सने लगा और उसे चूमते हुए बोला. "रो मत, चल तेरी गांड अभी नहीं मारता पर एक बार और चोदूम्गा जरूर और फिर आफिस जाऊम्गा." उसने अब प्यार से अपनी बहन के चेहरे , गाल और आम्खों को चूमना शुरू कर दिया. उसने कमला से उसकी जीभ बाहर निकालने को कहा और उसे मुंहे में लेकर कमला के मुख रस का पान करता हुआ कैन्डी की तरह उस कोमल लाल लाल जीभ को चूसने लगा.
थोड़ी ही देर में उसका लंड फ़िर खड़ा हो गया और उसने कमला की दूसरी बार चुदाई शुरू कर दी. चिपचिपे वीर्य से कमला की बुर अब एकदम चिकनी हो गयी थी इसलिये अब उसे ज्यादा तकलीफ़ नहीं हुई. 'पुचुक पुचुक पुचुक' की आवाज के साथ यह चुदाई करीब आधा घन्टा चली. कमला बहुत देर तक चुपचाप यह चुदाई सहन करती रही पर आखिर चुद चुद कर बिल्कुल लस्त होकर वह दर्द से सिसकने लगी. आखिर अमर ने जोर जोर से धक्के लगाने शुरू किये और पाम्च मिनट में झड़ गया.
झड़ने के बाद कुछ देर तो अमर मजा लेता हुआ अपनी कमसिन बहन के निस्तेज शरीर पर पड़ा रहा. फिर उठ कर उसने अपना लंड बाहर निकला. वह 'पुक्क' की आवाज से बाहर निकला. लंड पर वीर्य और बुर के रस का मिला जुला मिश्रण लगा था. कमला बेहोश पड़ी थी. अमर उसे पलंग पर छोड़ कर बाहर आया और दरवाजा लगा लिया. रेखा वापस आ गयी थी और बाहर बड़ी अधीरता से उसका इम्तजार कर रही थी. पति की तृप्त आम्खें देखकर वह समझ गयी कि चुदाई मस्त हुई है. "चोद आये मेरी गुड़िया जैसी प्यारी ननद को ?"
अमर तॄप्त होकर उसे चूमता हुआ बोला. "हां मेरी जान, चोद चोद कर बेहोश कर दिया साली को, बहुत रो रही थी, दर्द का नाटक खूभ किया पर मैम्ने नहीं सुना. क्या मजा आया उस नन्ही चूत को चोदकर." रेखा वासना के जोश में घुटने के बल अमर के सामने बैठ गयी और उसका रस भरा लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी. लंड पर कमला की बुर का पानी और अमर के वीर्य का मिलाजुला मिश्रण लगा था. पूरा साफ़ करके ही वह उठी.
अमर कपड़े पहन कर आ~म्फ़िस जाने को तैयार हुआ. उसने अपनी कामुक बीवी से पुछा कि अब वह क्या करेगी? रेखा बोली "इस बच्ची की रसीली बुर पहले चूसूम्गी जिसमें तुंहारा यह मस्त रस भरा हुआ है. फिर उससे अपनी चूत चुसवाऊम्गी. हम लड़कियों के पास मजा करने के लिये बहुत से प्यारे प्यारे अम्ग हैम. आज ही सब सिखा दूम्गी उसे"
अमर ने पूछा. "आज रात का क्या प्रोग्राम है रानी?" रेखा उसे कसकर चूमते हुए बोली. " जल्दी आना, आज एक ही प्रोग्राम है. तुंहारी बहन की रात भर गांड मारने का. खूब सता सता कर, रुला रुला कर गांड मारेम्गे साली की, जितना वह रोयेगी उतना मजा आयेगा. मै कब से इस घड़ी की प्रतीक्षा कर रही हूं"
अमर मुस्कराके बोला "बड़ी दुष्ट हो. लड़की को तड़पा तड़पा कर भोगना चाहती हो." रेखा बोली. "तो क्या हुआ, शिकार करने का मजा अलग ही है. बाद में उतना ही प्यार करूम्गी अपनी लाड़ली ननद को. ऐसा यौन सुख दूम्गी कि वह मेरी दासी हो जायेगी. हफ़्ते भर में चुद चुद कर फ़ुकला हो जायेगी तुंहारी बहन, फ़िर दर्द भी नहीं होगा और खुद ही चुदैल हमसे चोदने की माम्ग करेगी. पर आज तो उसकी कुम्वारी गांड मारने का मजा ले लेम." अमर हम्स कर चला गया और रेखा ने बड़ी बेताबी से कमरे में घुस कर दरवाजा लगा लिया.
contd.....
कमला होश में आ गयी थी और पलंग पर लेट कर दर्द से सिसक रही थी. चुदासी की प्यास खत्म होने पर अब उसकी चुदी और भोगी हुई बुर में खूब दर्द हो रहा था. रेखा उसके पास बैठ कर उसके नंगे बदन को प्यार से सहलाने लगी. "क्या हुआ मेरी कमला रानी को? नंगी क्यों पड़ी है और यह तेरी टांगों के बीच से चिपचिपा क्या बह रहा है?" बेचारी कमला शर्म से रो दी. "भाभी, भैया ने आज मुझे चोद डाला."
रेखा आश्चर्य का नाटक करते हुए बोली. "चोद डाला, अपनी ही नन्हीं बहन को? कैसे?" कमला सिसकती हुई बोली. "मैम गम्दी किताब देखती हुई पकड़ी गई तो मुझे सजा देने के लिये भैया ने मेरे कपड़े जबर्दस्ती निकाल दिये, मेरी चूत चूसी और फ़िर खूब चोदा. मेरी बुर फाड़ कर रख दी. गांड भी मारना चाहते थे पर मैम्ने जब खूब मिन्नत की तो छोड़ दिया" रेखा ने पलंग पर चड़ कर उसे पहले प्यार से चूमा और बोली. "ऐसा? देखूं जरा" कमला ने अपनी नाजुक टांगें फैला दी. रेखा झुक कर चूत को पास से देखने लगी.
कच्ची कमसिन ब्री तरह चुदी हुई लाल लाल कुम्वारी बुर देख कर उसके मुह में पानी भर आया और उसकी खुद की चूत मचल कर गीली होने लगी. वह बोली "कमला, डर मत, चूत फ़टी नहीं है, बस थोड़ी खुल गई है. दर्द हो रहा होगा, अगन भी हो रही होगी. फ़ूम्क मार कर अभी ठम्डी कर देती हूं तेरी चूत." बिल्कुल पास में मुंह ले जा कर वह फ़ूम्कने लगी. कमला को थोड़ी राहत मिली तो उसका रोना बन्द हो गया.
फ़ूम्कते फ़ूम्कते रेखा ने झुक कर उस प्यारी चूत को चूम लिया. फ़िर जीभ से उसे दो तीन बार चाटा, खासकर लाल लाल अनार जैसे दाने पर जीभ फ़ेरी. कमला चहक उठी. "भाभी, क्या कर रही हो?" "रहा नहीं गया रानी, इतनी प्यारी जवान बुर देखकर, ऐसे माल को कौन नहीं चूमना और चूसना चाहेगा? क्योम, तुझे अच्छा नहीं लगा?" रेखा ने उस की चिकनी छरहरी रानों को सहलाते हुए कहा.
"बहुत अच्छा लगा भाभी, और करो ना." कमला ने मचल कर कहा. रेखा चूत चूसने के लिये झुकती हुई बोली. "असल में तुंहारे भैया का कोई कुसूर नहीं है. तुम हो ही इतनी प्यारी कि औरत होकर मुझे भी तुम पर चढ़ जाने का मन होता है तो तेरे भैया तो आखिर मस्त जवान हैम." अब तक कमला काफ़ी गरम हो चुकी थी और अपने चूतड़ उचका उचका कर अपनी बुर रेखा के मुंह पर रगड़ने की कोशिश कर रही थी.
कमला की अधीरता देखकर रेखा बिना किसी हिचकिचाहट से उस कोमल बुर पर टूट पड़ी और उसे बेतहाशा चाटने लगी. चाटते चाटते वह उस मादक स्वाद से इतनी उत्तेजित हो गयी कि अपने दोनो हाथों से कमला की चुदी चूत के सूजे पपोटे फ़ैला कर उस गुलाबी छेद में जीभ अन्दर डालकर आगे पीछे करने लगी. अपनी भाभी की लम्बी गीली मुलायम जीभ से चुदना कमला को इतना भाया कि वह तुरन्त एक किलकारी मारकर झड़ गयी.
बात यह थी कि कमला को भी अपनी सुंदर भाभी बहुत अच्छी लगती थी. अपनी एक दो सहेलियों से उसने स्त्री स्त्री सम्बम्धों के बारे में सुन रखा था. उसकी एक सहेली तो अपनी मौसी के साथ काफ़ी करम करती थी. कमला भी ये किसी सुन सुन कर अपने भाभी के प्रति आकर्षित होकर कब से यह चाहती थी कि भाभी उसे बाहों में लेकर प्यार करे.
अब जब कल्पनानुसार उसकी प्यारी भाभी अपने मोहक लाल ओठों से सीधे उसकी चूत चूस रही थी तो कमला जैसे स्वर्ग में पहुम्च गयी. उसकी चूत का रस रेखा की जीभ पर चूने लगा और रेखा मस्ती से उसे निगलने लगी. बुर के रस और अमर के वीर्य का मिलाजुला स्वाद रेखा को अमृत जैसा लगा और वह उसे स्वाद ले लेकर पीने लगी.
अब रेखा भी बहुत कामातुर हो चुकी थी और अपनी जाम्घें रगड़ रगड़ कर स्खलित होने की कोशिश कर रही थी. कमला ने हाथोम्म में रेखा भाभी के सिर को पकड़ कर अपनी बुर पर दबा लिया और उसके घने लम्बे केशों में प्यार से अपनी उंगलियां चलाते हुए कहा. "भाभी, तुम भी नंगी हो जाओ ना, मुझे भी तुंहारी चूचियां और चूत देखनी है." रेखा उठ कर खड़ी हो गयी और अपने कपड़े उतारने लगी. उसकी किशोरी ननद अपनी ही बुर को रगड़ते हुए बड़ी बड़ी आम्खों से अपनी भाभी की ओर देखने लगी. उसकी खूबसूरत भाभी उसके सामने नंगी होने जा रही थी.
रेखा ने साड़ी उतार फ़ेकी और नाड़ा खोल कर पेटीकोट भी उतार दिया. ब्लाउज के बटन खोल कर हाथ ऊपर कर के जब उसने ब्लाउज उतारा तो उसकी स्ट्रैप्लेस ब्रा में कसे हुए उभरे स्तन देखकर कमला की चूत में एक बिजली सी दौड़ गयी. भाभी कई बार उसके सामने कपड़े बदलती थी पर इतने पास से उसके मचलते हुए मम्मों की गोलाई उसने पहली बार देखी थी. और यह मादक ब्रेसियर भी उसने पहले कभी नहीं देखी थी.
अब रेखा के गदराये बदन पर सिर्फ़ सफ़ेद जाम्घिया और वह टाइट सफ़ेद ब्रा बची थी. "भाभी यह कम्चुकी जैसी ब्रा तू कहां से लाई? तू तो साक्षात अप्सरा दिखती है इसमेम." रेखा ने मुस्करा कर कहा "एक फ़ैशन मेगेज़ीन में देखकर बनवाई है, तेरे भैया यह देखकर इतने मस्त हो जाते हैम कि रात भर मुझे चोद लेते हैम."
"भाभी रुको, इन्हें मैम निकालूम्गी." कहकर कमला रेखा के पीछे आकर खड़ी हो गयी और उसकी माम्सल पीठ प्यार से चूमने लगी. फिर उसने ब्रा के हुक खोल दिये और ब्रा उछल कर उन मोटे मोटे स्तनों से अलग होकर गिर पड़ी. उन मस्त पपीते जैसे उरोजों को देख्कर कमला अधीर होकर उन्हें चूमने लगी. "भाभी, कितनी मस्त चूचियां हैम तुंहारी. तभी भैया तुंहारी तरफ़ ऐसे भूखों की तरह देखते हैम." रेखा के चूचुक भी मस्त होकर मोटे मोटे काले कड़क जामुन जैसे खड़े हो गये थे. उसने कमला के मुंह मे एक निपल दे दिया और उस उत्तेजित किशोरी को भीम्च कर सीने से लगा लिया. कमला आम्खें बन्द कर के बच्चे की तरह चूची चूसने लगी.
रेखा के मुंह से वासना की सिसकारियां निकलने लगीं और वह अपनी ननद को बाहों में भर कर पलंग पर लेट गयी. "हाय मेरी प्यारी बच्ची, चूस ले मेरे निपल, पी जा मेरी चूची, तुझे तो मैम अब अपनी चूत का पानी भी पिलाऊम्गी."
कमला ने मन भर कर भाभी की चूचियां चूसीं और बीच में ही मुंह से निकाल कर बोली. "भाभी अब जल्दी से मां बन जाओ, जब इनमें दूध आएगा तो मैम ही पिया करूम्गी, अपने बच्चे के लिये और कोई इन्तजाम कर लेना." और फ़िर मन लगा कर उन मुलायम स्तनों का पान करने लगी. "जरूर पिलाऊम्गी मेरी रानी, तेरे भैया भी यही कहते हैम. एक चूची से तू पीना और एक से तेरे भैया." रेखा कमला के मुंह को अपने स्तन पर दबाते हुए बोली.
अपने निपल में उठती मीठी चुभन से रेखा निहाल हो गई थी. अपनी पैम्टी उसने उतार फ़ेकी और फ़िर दोनों जाम्घों में कमला के शरीर को जकड़कर उसे हचकते हुए रेखा अपनी बुर उस की कोमल जाम्घों पर रगड़ने लगी. रेखा के कड़े मदनमणि को अपनी जाम्घ पर रगड़ता महसूस करके कमला अधीर हो उठी. "भाभी, मुझे अपनी चूत चूसने दो ना प्लीज़"
"तो चल आजा मेरी प्यारी बहन, जी भर के चूस अपनी भाभी की बुर, पी जा उसका नमकीन पानी" कहकर रेखा अपनी माम्सल जाम्घें फैला कर पलंग पर लेट गयी. एक तकिया उसने अपने नितम्बों के नीचे रख लिया जिससे उसकी बुर ऊपर उठ कर साफ़ दिखने लगी.
वासना से तड़पती वह कमसिन लड़की अपनी भाभी की टांगों के बीच लेट गयी. रेखा की रसीली बुर ठीक उसकी आम्खों के सामने थी. घनी काली झाम्टों के बीच की गहरी लकीर में से लाल लाल बुर का छेद दिख रहा था. "हाय भाभी, कितनी घनी और रेशम जैसी झाम्टें हैम तुंहारी, काटती नहीं कभी?" उसने बालों में उंगलियां डालते हुए पूछा.
"नहीं री, तेरे भैया मना करते हैम, उन्हें घनी झाम्टें बहुत अच्छी लगती हैम." रेखा मुस्कराती हुई बोली. "हां भाभी, बहुत प्यारी हैम, मत काटा करो, मेरी भी बढ़ जाएं तो मैम भी नहीं काटूम्गी." कमला बोली. उससे अब और न रहा गया. अपने सामने लेटी जवान भरी पूरी औरत की गीली रिसती बुर में उसने मुंह छुपा लिया और चाटने लगी. रेखा वासना से कराह उठी और कमला का मुंह अपनी झाम्टों पर दबा कर रगड़ने लगी. वह इतनी गरम हो गयी थी कि तुरन्त झड़ गयी.
"हाय मर गयी रे कमला बिटिया, तेरे प्यारे मुंह को चोदूम, साली क्या चूसती है तू, इतनी सी बच्ची है फ़िर भी पुरानी रंडी जैसी चूसती है. पैदाइशी चुदैल है तू" दो मिनट तक वह सिर्फ़ हांफ़ते हुए झड़ने का मजा लेती रही. फ़िर मुस्कराकर उसने कमला को बुर चूसने का सही अन्दाज. सिखाना शुरू किया. उसे सिखाया कि पपोटे कैसे अलग किये जाते हैं, जीभ का प्रयोग कैसे एक चम्मच की तरह रस पीने को किया जाता है और बुर को मस्त करके उसमे से और अमृत निकलने के लिये कैसे क्लिटोरिस को जीभ से रगड़ा जाता है.
थोड़ी ही देर में कमला को चूत का सही ढंग से पान करना आ गया और वह इतनी मस्त चूत चूसने लगी जैसे बरसों का ज्ञान हो. रेखा पड़ी रही और सिसक सिसक कर बुर चुसवाने का पूरा मजा लेती रही. "चूस मेरी प्यारी बहना, और चूस अपनी भाभी की बुर, जीभ से चोद मुझे, आ ऽ ह ऽ , ऐसे ही रानी बिटिया ऽ , शा ऽ बा ऽ श."
काफ़ी झड़ने के बाद उसने कमला को अपनी बाहों में समेट लिया और उसे चूम चूम कर प्यार करने लगी. कमला ने भी भाभी के गले में बाहें डाल दीं और चुम्बन देने लगी. एक दूसरे के होंठ दोनों चुदैलें अपने अपने मुंह में दबा कर चूसने लगीम. रेखा ने अपनी जीभ कमला के मुंह में डाल दी और कमला उसे बेतहाशा चूसने लगी. भाभी के मुख का रसपान उसे बहुत अच्छा लग रहा था.
रेखा अपनी जीभ से कमला के मुंह के अम्दर के हर हिस्से को चाट रही थी, उस बच्ची के गाल, मसूड़े, तालू, गला कुछ भी नहीं छोड़ा रेखा ने. शैतानी से उसने कमला के हलक में अपनी लंबी जीभ उतार दी और गले को अम्दर से चाटने और गुदगुदाने लगी. उस बच्ची को यह गुदगुदी सहन नहीं हुई और वह खाम्स पड़ी. रेखा ने उसके खाम्सते हुए मुंह को अपने होंठों में कस कर दबाये रखा और कमला की अपने मुंह में उड़ती रसीली लार का मजा लेती रही.
आखिर जब रेखा ने उसे छोड़ा तो कमला का चेहरा लाल हो गया थी. "क्या भाभी, तुम बड़ी हरामी हो, जान बूझ कर ऐसा करती हो." रेखा उसका मुंह चूंअते हुए हम्सकर बोली. "तो क्या हुआ रानी? तेरा मुखरस चूसने का यह सबसे आसान उपाय है. मैने एक ब्लू फ़िल्म में देखा था."
फ़िर उस जवान नारी ने उस किशोरी के पूरे कमसिन बदन को सहलाया और खास कर उसके कोमल छोटे छोटे उरोजों को प्यार से हौले हौले मसला. फिर उसने कमला को सिखाया कि कैसे निपलों को मुंह में लेकर चूसा जाता है. बीच में ही वह हौले से उन कोमल निपलों को दाम्त से काट लेती थी तो कमला दर्द और सुख से हुमक उठती थी. "निपल काटो मत ना भाभी, दुखता है, नहीं , रुको मत, हा ऽ य, और काटो, अच्छा लगता है."
अम्त में उसने कमला को हाथ से हस्तमैथुन करना सिखाया."देख कमला बहन, हम औरतों को अपनी वासना पूरी करने के लिये लंड की कोई जरूरत नहीं है. लंड हो तो बड़ा मजा आता है पर अगर अकेले होम, तो कोई बात नहीम."
कमला भाभी की ओर अपनी बड़ी बड़ी आम्खों से देखती हुई बोली "भाभी उस किताब में एक औरत ने एक मोटी ककड़ी अपनी चूत में घुसेड़ रखी थी." रेखा हम्स कर बोली "हां मेरी रानी बिटिया, ककड़ी, केले, गाजर, मूली, लम्बे वाले बैम्गन, इन सब से मुट्ठ मारी जा सकती है. मोटी मोमबत्ती से भी बहुत मजा आता है. धीरे धीरे सब सिखा दूम्गी पर आज नहीम. आज तुझे उंगली करना सिखाती हूम. मेरी तरफ़ देख."
रेखा रम्डियों जैसी टांगें फ़ैलाकर बैठ गयी और अपनी अम्गूठे से अपने क्लिटोरिस को सहलाना शुरू कर दिया. कमला ने भी ऐसा ही किया और आनन्द की एक लहर उसकी बुर में दौड़ गयी. रेखा ने फ़िर बीच की एक उंगली अपनी खुली लाल चूत में डाल ली और अन्दर बाहर करने लगी.
भाभी की देखादेखी कमला भी उंगली से हस्तमैथुन करने लगी. पर उसका अम्गूठा अपने क्लिट पर से हट गया. रेखा ने उसे समझाया. "रानी, उंगली से मुट्ठ मारो तो अम्गूठा चलता ही रहना चाहिये अपने मणि पर." धीरे धीरे रेखा ने दो उंगली घुसेड़ लीं और अन्त में वह तीन उंगली से मुट्ठ मारने लगी. फ़चाफ़च फ़चाफ़च ऐसी आवाज उसकी गीली चूत में से निकल रही थी.
कमला को लगा कि वह तीन उंगली नहीं घुसेड़ पायेगी पर आराम से उसकी तीनों उंगलियां जब खुद की कोमल बुर में चली गयीं तो उसके मुंह से आश्चर्य भरी एक किलकारी निकल पड़ी. रेखा हम्सने लगी. "अभी अभी भैया के मोटे लंड से चुदी है इसलिये अब तेरी चारों उंगलियां चली जायेम्गी अन्दर. वैसे मजा दो उंगली से सबसे ज्यादा आता है."
दोनों अब एक दूसरे को देख कर अपनी अपनी मुट्ठ मारने लगीम. रेखा अपने दूसरे हाथ से अपने उरोज दबाने लगी और निपलों को अम्गूठे और एक उंगली में लेकर मसलले लगी. कमला ने भी ऐसा ही किया और म्स्ती में झूंअ उठी. अपनी चूचियां खुद ही दबाते हुए दोनों अब लगातार सड़का लगा रही थी.
रेखा बीच बीच में अपनी उंगली अपने मुंह में डालकर अपना ही चिपचिपा रस चाट कर देखती और फिर मुट्ठ मारने लगती. कमला ने भी ऐसा ही किया तो उसे अपनी खुद की चूत का स्वाद बहुत प्यारा लगा. रेखा ने शैतानी से मुस्कराते हुए उसे पास खिसकने और मुंह खोलने को कहा. जैसे ही कमला ने अपना मुंह खोला, रेखा ने अपने चूत रस से भरी चिपचिपी उंगलियां उसके मुंह में दे दीम.
रेखा ने भी कमला का हाथ खीम्च कर उसकी उंगलियां मुंह में दबा लीं और चाटने लगी. "यही तो अमृत है जिसके लिये यह सारे मर्द दीवाने रहते हैम. बुर का रस चूसने के लिये साले हरामी मादरचोद मरे जाते हैम. बुर के रस का लालच दे कर तुम इनसे कुछ भी करवा सकती हो. तेरे भैया तो रात रात भर मेरी बुर चूसकर भी नहीं थकते."
कई बार मुट्ठ मारने के बाद रेखा बोली. "चल छोटी अब नहीं रहा जाता. अब तुझे सिक्सटी - नाईन का आसन सिखाती हूम. दो औरतों को आपस में सम्भोग करने के लिये यह सबसे मस्त आसन है. इसमें चूत और मुंह दोनों को बड़ा सुख मिलता है." रेखा अपनी बाम्यी करवट पर लेट गयी और अपनी माम्सल दाहिनी जाम्घ उठा कर बोली. "आ मेरी प्यारी बच्ची, भाभी की टांगों में आ जा." कमला उल्टी तरफ़ से रेखा की निचली जाम्घ पर सिर रख कर लेट गयी. पास से रेखा की बुर से बहता सफ़ेद चिपचिपा स्त्राव उसे बिल्कुल साफ़ दिख रहा था और उसमें से बड़ी मादक खुशबू आ रही थी.
रेखा ने उसका सिर पकड़ कर उसे अपनी चूत में खीम्च लिया और अपनी बुर के पपोटे कमला के मुंह पर रख दिये. "चुम्बन ले मेरे निचले होंठों का जैसे कि मेरे मुंह का ले रही थी." जब कमला ने रेखा की चूत चूमना शुरू कर दिया तो रेखा बोली. "अब जीभ अन्दर डाल रानी बिटिया" कमला अपनी जीभ से भाभी को चोदने लगी और उसके रिसते रस का पान करने लगी. रेखा ने अब अपनी उठी जाम्घ को नीचे करके कमला का सिर अपनी जाम्घों मे जकड़ लिया और टांगें साइकिल की तरह चला के उसके कोमल मुंह को सीट बनाकर उसपर मुट्ठ मारने लगी.
भाभी की माम्सल जाम्घों में सिमट कर कमला को मानो स्वर्ग मिल गया. कमला मन लगा कर भाभी की चूत चूसने लगी. रेखा ने बच्ची की गोरी कमसिन टांगें फैला कर अपना मुंह उस नन्ही चूत पर जमा दिया और जीभ घुसेड़ घुसेड़ कर रसपान करने लगी. कमला ने भी अपनी टांगों के बीच भाभी का सिर जकड़ लिया और टांगें कैम्ची की तरह चलाती हुई भाभी के मुंह पर हस्तमैथुन करने लगी.
दस मिनट तक कमरे में सिर्फ़ चूसने, चूमने और कराहने की अवाजें उठ रही थी. रेखा ने बीच में कमला की बुर में से मुंह निकालकर कहा. "रानी मेरा क्लिटोरिस दिखता है ना?" कमला ने हामी भरी. "हां भाभी, बेर जितना बड़ा हो गया है, लाल लाल है." "तो उसे मुंह में ले और चा~म्कलेट जैसा चूस, उसपर जीभ रगड़, मुझे बहुत अच्छा लगता है मेरी बहना, तेरे भैया तो माहिर हैम इसमेम."
रेखा ने जोर जोर से साइकिल चला कर आखिर अपनी चूत झड़ा ली और आनन्द की सीत्कारियां भरती हुई कमला के रेशमी बालों में अपनी उंगलियां चलाने लगी. कमला को भाभी की चूत मे से रिसते पानी को चाटने में दस मिनट लग गये. तब तक वह खुद भी रेखा की जीभ से चुदती रही. रेखा ने उसका जरा सा मटर के दाने जैसा क्लिटोरिस मुंह में लेके ऐसा चूसा कि वह किशोरी भी तड़प कर झड़ गयी. कमला का दिल अपनी भाभी के प्रति प्यार और कामना से भर उठा क्योंकि उसकी प्यारी भाभी अपनी जीभ से उसे दो बार झड़ा चुकी थी. एक दूसरे की बुर को चाट चाट कर साफ़ करने के बाद ही दोनों चुदैल भाभी ननद कुछ शांत हुईम.
थोड़ा सुस्ताने के लिये दोनों रुकीं तब रेखा ने पूछा. "कमला बेटी, मजा आया?" कमला हुमक कर बोली "हाय भाभी कितना अच्छा लगता है बुर चूसने और चुसवाने मेम." रेखा बोली "अपनी प्यारी प्रेमिका के साथ सिक्सटी - नाइन करने से बढ़कर कोई सुख नहीं है हम जैसी चुदैलों के लिये, कितना मजा आता है एक दूसरे की बुर चूस कर. अह क्रीड़ा हम अब घन्टों तक कर सकते हैम."
"भाभी चलो और करते हैम ना" कमला ने अधीरता से फ़रमाइश की और रेखा मान गयी. ननद भाभी का चूत चूसने का यह कार्यक्रम दो तीन घन्टे तक लगातार चला जब तक दोनों थक कर चूर नहीं हो गयीम. कमला कभी इतनी नहीं झड़ी थी. आखिर लस्त होकर बिस्तर पर निश्चल पड़ गई. दोनों एक दूसरे की बाहों में लिपटकर प्रेमियों जैसे सो गयीम.
शाम को रेखा ने चूम कर बच्ची को उठाया. "चल कमला, उठ, तेरे भैया के आने का समय हो गया. कपड़े पहन ले नहीं तो नंगा देखकर फ़िर तुझ पर चढ़ पढ़ेंगे" कमला घबरा कर उठ बैठी. "भाभी मुझे बचा लो, भैया को मुझे चोदने मत देना, बहुत दुखता है."
रेखा ने उसे डांटा "पर मजे से हचक के हचक के चुदा भी तो रही थी बाद मेम, 'हाय भैया, चोदो मुझे' कह कह के". कमला शरमा कर बोली. "भाभी बस आज रात छोड़ दो, मेरी बुर को थोड़ा आराम मिल जाये, कल से जो तुम कहोगी, वह करूंगी". "चल अच्छा, आज तेरी चूत नहीं चुदने दूंगी." रेखा ने वादा किया और कमला खुश होकर उससे लिपट गयी.
अमर वापस आया तो तन्नाया हुआ लंड लेकर. उसके पैम्ट में से भी उसका आकार साफ़ दिख रहा था. कमला उसे देख कर शरमाती हुई और कुछ घबरा कर रेखा के पीछे छुप गयी. दोपहर की चुदाई की पीड़ा याद कर उसका दिल भय से बैठा जा रहा था. "भाभी, भैया से कहो ना कि अब मुझे ना चोदेम, मेरी बुर अभी तक दुख रही है. अब चोदा तो जरूर फ़ट जायेगी!" रेखा ने आम्ख मारते हुए अमर को झूठा डाम्टते हुए कहा कि वह कमला की बुर आज न चोदे.
अमर समझ गया कि सिर्फ़ बुर न चोदने का वादा है, गांड के बारे में तो कुछ बातें ही नहीं हुईम. वह बोला "चलो, आज तुंहारी चूत नहीं चोदूंगा मेरी नन्ही बहन, पर आज से तू हमारे साथ हमारे पलंग पर सोयेगी और मै और तेरी भाभी जैसा कहेंगे वैसे खुद को चुदवाएगी और हमें अपनी यह कमसिन जवानी हर तरीके से भोगने देगी."
अमर के कहने पर रेखा ने कमला की मदद से जल्दी जल्दी खाना बनाया और भोजन कर किचन की साफ़ सफ़ायी कर तीनों नौ बजे ही बेडरूम में घुस गये. अमर ने अपने सारे कपड़े उतार दिये और अपना खड़ा लंड हाथ में लेकर उसे पुचकारता हुआ खुद कुर्सी में बैठ गया और भाभी ननद को एक दूसरे को नंगा करने को कहकर मजा देखने लगा.
दोनों चुदैलों के मुंह में उस रसीले लंड को देखकर पानी भर आया. कमला फ़िर थोड़ी डर भी गई थी क्योंकि वह कुछ देर के लिये भूल ही गई थी कि अमर का लंड कितना महाकाय है. पर उसके मन में एक अजीब वासना भी जाग उठी. वह मन ही मन सोचने लगी कि अगर भैया फ़िर से उसे जबरदस्ती चोद भी डालें तो दर्द तो होगा पर मजा भी आयेगा.
रेखा ने पहले अपने कपड़े उतारे. ब्रेसियर और पैंटी कमला से उतरवाई जिससे कमला भी भाभी के नंगे शरीर को पास से देखकर फ़िर उत्तेजित हो गयी. फ़िर रेखा ने हम्सते हुए शरमाती हुई उस किशोरी की स्कर्ट और पैम्टी उतारी. ब्रेसियर उसने दोपहर की चुदाई के बाद पहनी ही नहीं थी. रेखा उस खूबसूरत छोकरी के नग्न शरीर को बाहों में भरकर बिस्तर पर लेट गयी और चूमने लगी. रेखा की बुर कमला का कमसिन शरीर बाहों में पाकर गीली हो गई थी. साथ ही रेखा जानती थी कि आज रात कमला की कैसी चुदाई होने वाली है और इसलिये उसे कमला की होने वाले ठुकाई की कल्पना कर कर के और मजा आ रहा था.
वह अमर को बोली. "क्योम्जी, वहां लंड को पकड़कर बैठने से कुछ नहीं होगा, यहां आओ और इस मस्त चीज़ को लूटना शुरू करो." अमर उठ कर पलंग पर आ गया और फ़िर दोनों पति पत्नी मिलकर उस कोमल सकुचाती किशोरी को प्यार करने के लिये उसपर चढ़ गये.
रेखा कमला का प्यारा मीठा मुखड़ा चूमने लगी और अमर ने अपना ध्यान उसके नन्हें उरोजों पर लगाया. झुक कर उन छोटे गुलाब की कलियों जैसे निपलों को मुंह में लिया और चूसने लगा. कमला को इतना अच्छा लगा कि उसने अपनी बाम्हें अपने बड़े भाई के गले में डाल दीं और उसका मुंह अपनी छाती पर भीम्च लिया कि और जोर से निपल चूसे.
उधर रेखा ने कमला की रसीली जीभ अपने मुंह में ले ली और उसे चूसते हुए अपने हाथों से धीरे धीरे उसकी कमसिन बुर की मालिश करने लगी. अपनी उंगली से उसने कमला के क्लिटोरिस को सहलाया और चूत के पपोटों को दबाया और खोलकर उममें उंगली करनी लगी.
उधर अमर भी बारी बारी से कमला के चूचुक चूस रहा था और हाथों में उन मुलायम चूचियों को लेकर प्यार से सहला रहा था. असल में उसका मन तो हो रहा था कि दोपहर की तरह उन्हें जोर जोर से बेरहमी के साथ मसले और कमला को रुला दे पर उसने खुद को काबू में रखा. गांड मारने में अभी समय था और वह अभी से अपनी छोटी बहन को डराना नहीं चाहता था. उसने मन ही मन सोचा कि गांड मारते समय वह उस खूबसूरत कमसिन गुड़िया के मम्मे मन भर कर भोम्पू जैसे दबाएगा.
कमला अब तक मस्त हो चुकी थी और भाभी के मुंह को मन लगा कर चूस रही थी. उसकी कच्ची जवान बुर से अब पानी बहने लगा था. रेखा ने अमर से कहा. "लड़की मस्त हो गयी है, बुर तो देखो क्या चू रही है, अब इस अमृत को तुम चूसते हो या मैम चूस लूम?"
अमर ने उठ कर कमला के सिर को अपनी ओर खीम्चते हुआ कहा "मेरी रानी, पहले तुम चूस लो अपनी ननद को, मैम तब तक थोड़ा इसके मुंह का स्वाद ले लूम, फ़िर इसे अपना लंड चुसवाता हूं. दोपहर को रह ही गया, यह भी बोल रही होगी कि भैया ने लंड का स्वाद भी नहीं चखाया"
अमर ने अपने होंठ कमला के कोमल होंठों पर जमा दिये और चूस चूस कर उसे चूमता हुआ अपनी छोटी बहन के मुंह का रस पीने लगा. उधर रेखा ने कमला की टांगें फ़ैलायीं और झुक कर उसकी बुर चाटने लगी. उसकी जीभ जब जब बच्ची के क्लिटोरिस पर से गुजरती तो एक धीमी सिसकी कमला के अमर के होंठों के बीच दबे मुंह से निकल जाती. उस कमसिन चूत से अब रस की धार बह रही थी और उसका पूरा फ़ायदा उठा कर रेखा बुर में जीभ घुसेड़ घुसेड़ कर उस अमृत का पान करने लगी.
अमर ने कमला को एक आखरी बार चूम कर उसका सिर अपनी गोद में ले लिया. फ़िर अपना बड़ा टमाटर जैसा सुपाड़ा उसके गालों और होंठों पर रगड़ने लगा."ले कमला, जरा अपने भैया के लंड का मजा ले, चूस कर देख क्या मजा आयेगा. डालूम तेरे मुंह मेम?" उसने पूछा.
कमला को भी सुपाड़े की रेशमी मुलायम चमड़ी का स्पर्श बड़ा अच्छा लग रहा था. " हाय भैया, बिलकुल मखमल जैसा चिकना और मुलायम है." वह किलकारी भरती हुई बोली. अमर ने उसका उत्साह बढ़ाया और लंड को कमला के मुंह में पेलने लगा.
"चूस कर तो देख, स्वाद भी उतना ही अच्छा है." रेखा ने कमला की जाम्घों में से जरा मुंह उठाकर कहा और फ़िर बुर का पानी चूसने में लग गयी. कमला अब मस्ती में चूर थी. वह अपनी जीभ निकालकर इस लंड और सुपाड़े को चाटने लगी. अमर ने काफ़ी देर उसका मजा लिया और फ़िर कमला के गाल दबाता हुआ बोला. "चल बहुत खेल हो गया, अब मुंह में ले और चूस."
गाल दबाने से कमला का मुंह खुल गया और अमर ने उसमें अपना सुपाड़ा घुसेड़ दिया. सुपाड़ा बड़ा था इस लिये कमला को अपना मुंह पूरी तरह खोलना पड़ा. पर सुपाड़ा अम्दर जाते ही उसे इतना मजा आया कि मुंह बम्द कर के वह उसे एक बड़े ला~म्लीपा~म्प जैसे चूसने लगी. अमर ने एक सुख की आह भरी, अपनी छोटी बहन के प्यारे मुंह का स्पर्श उसके लंड को सहन नहीं हो रहा था. "हाय रेखा, मैम झड़ने वाला हूं इस छोकरी के मुंह मेम. निकाल लूम लौड़ा? आगे का काम शुरू करते हैम."
रेखा को मालूम था कि अमर अपनी छोटी बहन की गांड मारने को लालायित है. उसने जब लंड का साइज़ देखा तो समझ गई कि अगर झड़ाया नहीं गया और इसी लंड से बच्ची की गांड मारी गई तो जरूर फ़ट जाएगी. इसलिये वह भी बोली. "ऐसा करो, मुट्ठ मार लो कमला के मुंह मेम, उसे भी जरा इस गाढ़े गाढ़े वीर्य का स्वाद चखने दो. मै तो रोज ही पाती हूं, आज मेरी ननद को पाने दो यह प्रसाद."
अमर दीवाना हुआ जा रहा था. उसने एक हाथ से कमला के सिर को पकड़ कर सहारा दिया कि धक्कों से आगे पीछे न हो और दूसरे हाथ से लंड का डम्डा मुट्ठी में लेकर जोर जोर से आगे पीछे करता हुआ हस्तमैथुन करने लगा. मुंह में फ़ूलता सिकुड़ता लज़ीज़ सुपाड़ा उस किशोरी को इतना भाया कि जीभ रगड़ रगड़ कर आम्खें बम्द कर के वह उस रसीले फ़ल को चूसने लगी.
अमर को इतना सुख सहन नहीं हुआ और पाम्च ही मिनिट में वह एकदम स्खलित हो गया. "हा ऽ य री ऽ प्यारी बच्ची, तूने मुझे मार डाला, रेखा रानी, यह तो चूसने में उस्ताद है, ऊ ऽ आह ऽ ऽ " कमला मलाई जैसा गाढ़ा गरम गरम वीर्य बड़े स्वाद से निगल रही थी. पहली बार वीर्य निगला और वह भी बड़े भाई का! अमर का उछलता लंड उसने आखरी बूम्द निकलने तक अपने मुंह में दबाए रखा जब तक वह सिकुड़ नहीं गया.
कमला भी अबतक रेखा के चूसने से कई बार झड़ गई थी. रेखा चटखारे ले लेकर उसकी बुर का पानी चूस रही थी. अमर बोला "चलो, बाजू हटो, मुझे भी अपनी बहन की चूत चूसने दो." कमला मस्ती में बोली "हां भाभी, भैया को मेरी बुर का शरबत पीने दो, तुम अब जरा मुझे अपनी चूत चटाओ भाभी, जल्दी करो ऽ ना ऽ" वह मचल उठी.
रेखा उठी और उठ कर कुर्सी में बैठ गई. अपनी भरी पूरी गुदाज टांगें फ़ैला कर बोली "आ मेरी रानी, अपनी भाभी की बुर में आ जा, देख भाभी की चूत ने क्या रस बनाया है अपनी लाड़ली ननद के लिये."
कमला उठकर तुरम्त रेखा के सामने फ़र्श पर बैठ गयी और भाभी की बुर अपने हाथों से खोलते हुए उसे चाटने लगी. उस कोमल जीभ का स्पर्श होते ही रेखा मस्ती से सिसक उठी और कमला के रेशमी बालों में अपनी उंगलियां घुमाती हुई उसे पास खीम्च कर और ठीक से चूसने को कहने लगी. "हाय मेरी गुड़िया, क्या जीभ है तेरी, चाट ना, और मन भर कर चाट, जीभ अम्दर भी डाल ननद रानी, असली माल तो अम्दर है." कमला के अधीर चाटने से रेखा कुछ ही देर में झड़ गयी और चुदासी की प्यासी कमला के लिये तो मानों रस की धार उसकी भाभी की बुर से फ़ूट पड़ी.
अमर अब तक कमला के पीछे लेट गया था. सरककर उसने कमला के नितम्ब फ़र्श पर से उठाये और अपना सिर उसके नीचे लाकर फ़िर से कमला को अपने मुंह पर ही बिठा लिया. उसकी रसीली चूत चूसते हुए वह अपनी छोटी बहन के नितम्ब प्यार से सहलाने लगा. कमला तो अब मानों काम सुख के सागर में गोते लगा रही थी. एक तरफ़ उसे अपनी भाभी की बुर का रस चूसने मिल रहा था और दूसरी ओर उसके भैया उसकी चूत चूस रहे थे. वह तुरम्त झड़ गयी और मस्ती में ऊपर नीचे होते हुए अमर को अपनी बुर का रस पिलाते हुए उसका मुंह चोदने लगी.